भाकृअनुप – केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुम्बई का 13वां दीक्षांत समारोह

3 मार्च, 2017, मुम्बई

भाकृअनुप- केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान (सीआईएफई), मुम्बई द्वारा 3 मार्च, 2017 को 13वां दीक्षांत समारोह मानाया गया। डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। श्री महादेव जगन्नाथ जनकर, पशुपालन मंत्रालय, डेरी विकास एवं मात्स्यिकी विकास मंत्री, मुम्बई, महाराष्ट्र; श्री गजानन कीर्तिकर, सांसद, उत्तर-दक्षिणी, गोरेगांव, मुम्बई; डॉ. जे.के. जेना, उपमहानिदेशक (मात्स्यिकी), भाकृअनुप तथा डॉ. भारती लावेकर, विधायक, वर्सोवा, मुम्बई, महाराष्ट्र कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे।

भाकृअनुप – केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुम्बई का 13वां दीक्षांत समारोहभाकृअनुप – केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुम्बई का 13वां दीक्षांत समारोहभाकृअनुप – केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, मुम्बई का 13वां दीक्षांत समारोह

डॉ. गोपाल कृष्णन्, निदेशक व कुलपति, आईसीएआर- सीआईएफई ने अपने स्वागत भाषण में संस्थान की शैक्षणिक व अनुसंधान उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अनुसंधान और प्राथमिक क्षेत्रों पर चर्चा करने के साथ ही संस्थान द्वारा जारी प्रमुख कार्यक्रमों की उपलब्धियों और नई शैक्षणिक पहल की भी जानकारी दी। डॉ. लावे ने अपने संबोधन में नीली क्रांति की जरूरत के बारे में संकेत दिया और संस्थान में मात्स्यिकी विज्ञान स्नातक पाठ्यक्रम की संभावना के बारे में चर्चा की जो वर्सोवा के मछुआरा समुदाय के छात्रों को लाभ पहुंचाएगा। श्री कीर्तिकर ने इस बात पर बल दिया कि संस्थान में महाराष्ट्र के मछुआरों के लिए मात्स्यिकी में कौशल विकास कार्यक्रम पर आधारित सार्टिफिकेट कोर्स की शुरूआत की जानी चाहिए। डॉ. जे.के. जेना, उपमहानिदेशक (मात्स्यिकी), भाकृअनुप ने खाद्य व पोषण सुरक्षा के लिए मात्स्यिकी के महत्व तथा इसकी प्राप्ति में युवा स्नातकों की भूमिका पर चर्चा की। डॉ. महापात्र ने मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे देश में किसानों की आय दोगुनी करने और नीली क्रांति को सफल बनाने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने उद्यमशीलता विकास पर बल दिया जिससे युवा स्नातक नौकरी ढूंढने के बजाय नौकरियां प्रदान कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने तथा नीली क्रांति को साकार बनाने वाली व अन्य जारी पहलों की भी चर्ची की।

दीक्षांत समारोह के दौरान 151 विद्यार्थियों को एम.एफ.एससी. की डिग्री तथा 54 विद्यार्थियों को पीएच. डी. की उपाधि प्रदान की गई। इसके साथ ही श्रेष्ठ विद्यार्थियों को 29 स्वर्ण पदक पुरस्कार प्रदान किये गये। विद्यार्थी सुश्री संपा पाल ने वर्ष 2013-15 में और श्री श्याम, के.यू. ने वर्ष 2014-16 की परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किये।

(प्रस्तुतिः हिन्दी सम्पादकीय एकक)