दलहन उत्‍पादन प्रौद्योगिकी पर जोनल जागरूकता कार्यशाला

11 दिसम्‍बर, 2015, जोधपुर, राजस्‍थान

भाकृअनुप – कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्‍थान (अटारी), जोधपुर द्वारा राजस्‍थान तथा गुजरात राज्‍य के कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के लिए दो दिवसीय जोनल कार्यशाला का आयोजन आज यहां भाकृअनुप – केन्‍द्रीय शुष्‍क क्षेत्र अनुसंधान संस्‍थान (ICAR-CAZRI), जोधपुर में किया गया।

Zonal Sensitization Workshop on Pulse Production Technology Zonal Sensitization Workshop on Pulse Production Technology

उद्घाटन सत्र के मुख्‍य अतिथि और भाकृअनुप – केन्‍द्रीय शुष्‍क क्षेत्र अनुसंधान संस्‍थान जोधपुर के निदेशक डॉ. सी.बी. पाण्‍डेय ने इस बात पर बल दिया कि नवीनतम कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करने के लिए कृषि विज्ञान केन्‍द्र किसी भी संस्‍थान का दर्पण होते हैं। उन्‍होंने कहा कि पंचायत स्‍तर के माध्‍यम से कार्यक्रमों को लागू किया जाना चाहिए। साथ ही उन्‍होंने बदलती जलवायु परिस्थिति में नवोन्‍मेष के त्‍वरित प्रसार के लिए सोशल ऐप्‍स को अपनाने की अपील की।

डॉ. पी.पी. रोहिल्ला, प्रभारी, निदेशक, अटारी ने सूचित किया कि उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए राजस्‍थान तथा गुजरात राज्‍यों में राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत आबंटित 1130 हैक्‍टयर क्षेत्रफल को शामिल करते हुए दलहन की फसलों पर कुल 2825  अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किए गए हैं।

डॉ. एस.जे. सिंह, निदेशक, राजस्‍थान कृषि अनुसंधान संस्‍थान (RARI),  दुर्गापुर ने अनुसंधानकर्मियों से ऐसे जीनप्ररूप विकसित करने की अपील की जिनसे पुष्‍पन से 15 दिन पहले गांठों में वृद्धि हो।

डॉ. वी.के. पाण्‍डेय, संयुक्‍त निदेशक (प्रसार), जोधपुर ने कहा कि जोन में दलहन की उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए यह सही समय पर की गई पहल है। साथ ही उन्‍होंने कहा कि दलहन उत्‍पादन में पीले मोजेक वायरस के कारण होने वाला नुकसान चिन्‍ता का विषय है।

इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्‍द्रों, राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों, राज्‍य कृषि विभागों के वरिष्‍ठ अधिकारियों और संबंधित संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

डॉ. एम.एस. मीणा, प्रधान वैज्ञानिक ( कृषि प्रसार), भाकृअनुप – कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्‍थान, जोधपुर ने धन्‍यवाद ज्ञापन प्रस्‍तुत किया।      

 (स्रोत :भाकृअनुप – कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्‍थान (अटारी), जोधपुर )