राष्ट्रीय विचार-विमर्श....कृषि के विकास के लिए संगठित कृषि और प्रसार आवश्यक

नई दिल्ली, 01 नवम्बर, 2010

‘भारत की कृषि योग्य भूमि अनेक छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित है। यह कृषि विकास के सामने बहुत बड़ी समस्या है। हमें इससे निजात पाने की आवश्यकता है।’ यह कहना है प्रो. के. वी. थॉमस, केंद्रीय कृषि, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री का। वे कृषि विस्तार विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, आईसीएआर द्वारा कृषि विस्तार में भविष्य के दृष्टिकोण पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार-विमर्श का उद्घाटन कर रहे थे।

अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. थॉमस ने भारतीय कृषि के विभिन्न पहलुओं के विषय में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हमारे यहां व्यवस्थित कृषि की कमी है। हमें कृषि के विकास के लिए कृषि को संगठित करने की जरूरत है। इसी क्रम में उन्होंने सिंचाई की समस्या का भी उल्लेख किया और कहा कि कृषि में तीव्र गति से विकास के लिए इस समस्या का शीघ्र समाधान आवश्यक है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, केवीके के कार्यों की सराहना की और कहा कि जो केवीके अच्छा कार्य कर रहे हैं उन्हें उनके कार्यों के लिए पुरस्कृत किया जाना चाहिए तथा जो अभी इस क्षेत्र में पीछे हैं उन्हें प्रोत्साहन द्वारा आगे बढ़ाने की जरूरत है।

प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन, अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कृषि वैज्ञानिक, नीति नियोजक तथा चिंतक ने अपने उद्बोधन में वर्तमान सरकार के कृषि कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह सरकार अपने निर्देशों को अधिकारों में तब्दील करने का प्रशंसनीय कार्य कर रही है। उन्होंने इस परिप्रेक्ष्य में शिक्षा के अधिकार और खाद्य सुरक्षा के अधिकार का भी उल्लेख किया तथा कहा कि खाद्य सुरक्षा के वादों को पूरा करने के लिए देश को अधिक कृषि उत्पादन करने की जरूरत है। वैश्विक भूख सूचकांक के संदर्भ में अपनी चिंता जाहिर करते हुए प्रो. स्वामीनाथन ने कहा कि भारत की स्थिति सुधारने की आवश्यकता है। हमें ऊपर आने की जरूरत है। इसके लिए हमें ‘लैब टू लैंड’ पद्धति को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र को कृषि उद्योग केंद्र बनाने पर जोर देते हुए कहा कि आज के औद्योगिक युग में कृषि विज्ञान केंद्र को कृषि उद्योग के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने कृषि में महिलाओं की भागीदारी पर भी जोर दिया। .

प्रो. अभिजीत सेन, योजना आयोग के सदस्य ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आईसीएआर कृषि के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है, जो सराहनीय है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभी और बहुत सारे कार्य करने बाकी हैं और हमें उम्मीद है कि परिषद इसमें सफल होगी। कृषि विकास के क्षेत्र में केवीके की भूमिकाओं का उल्लेख करते हुए प्रो. सेन ने कहा कि केवीके की पहुंच प्रत्येक व्यक्ति तक होनी चाहिए, तभी यह सही तरीके से कार्य कर सकेगा। उन्होंने कृषि में विचारों तथा जानकारी के आदान-प्रदान पर भी काफी बल दिया और कहा कि कृषि के विकास के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रदूषण से होने वाली कृषि चुनौतियों की ओर भी लोगों का ध्यान केंद्रित कराया।

डॉ. आर. एस. परोदा, पूर्व सचिव, डेयर और महानिदेशक, आईसीएआर तथा अध्यक्ष, टीएएएस ने ग्रामीण स्तर पर कार्य करने की जरूरतों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसानों की समृद्धि के कृषि के विकास की परिकल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि दोनों के साथ मिलकर कार्य करने से कृषि में सफल क्रांति आ सकती है। उन्होंने भारत में एक समर्पित कृषि चैनल शुरू करने की भी सलाह दी और कहा कि इससे किसानों को बहुत लाभ मिलेगा।

डॉ. पंजाब सिंह, पूर्व सचिव, डेयर और महानिदेशक, आईसीएआर ने इस आयोजन को बहुत ही उपयोगी बताते हुए कहा कि किसानों के साथ आज ‘आल इज वेल’ नहीं है। आजादी के बाद भी आज किसान संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए ‘फार्मर फस्ट’ की पद्धति को अपनाना होगा। सफल कृषि से ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि भारत व कृषि एक-दूसरे के समानार्थी हैं। बिना कृषि के विकास के भारत आगे नहीं बढ़ सकता।

इससे पूर्व डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) और महानिदेशक, आईसीएआर ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने केवीके के कार्यों की सराहना की और उसे इस कार्य में आगे बढ़ने के लिए अपने सुझाव भी दिए।

इस अवसर पर श्री पी. के. बासु, सचिव, कृषि व सहकारिता विभाग, डीएसी ने कृषि के विकास के क्षेत्र में प्रौद्योगिकियों के उपयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रौद्योगिकियों के समुचित उपयोग से कृषि का तेजी से विकास किया जा सकता है। उन्होंने अपने भाषण में आईसीएआर के लोगो तथा उसके आदर्श वाक्य ‘हर कदम हर डगर, किसानों का हमसफर’ की भी चर्चा की। इसके अलावा कृषि विस्तार विभाग के उप-महानिदेशक, डॉ. के. डी. कोकाटे ने अपने एक प्रस्तुतिकरण के माध्यम से केवीके के उद्देश्यों, कार्यों और नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।

राष्ट्रीय विचार-विमर्श में परिषद के संस्थानों के निदेशक, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, राज्य कृषि विभागों के प्रसार अधिकारी, कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान तथा कृषि प्रसार कार्य में संलग्न एनजीओ भागीदारी कर रहे हैं।

(स्रोत: एनएआईपी सब-प्रोजेक्ट मास-मीडिया मोबिलाइजेशन, दीपा ))