दूसरी हरित क्रांति में सहायक सिद्ध हो सकती है सूचना शक्ति

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2010

खाद्य सुरक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सूचना शक्ति उपयोगी सिद्ध हो सकती है। भारत सही समय पर किसानों को मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराकर कृषि उत्पादकता को 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। यह बात श्री शैलेश नायक, सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, नई दिल्ली में ‘मौसम पूर्वानुमान और कृषि सलाहकार सेवा’ विषय पर आयोजित इंटरफेस बैठक में कही।

श्री नायक ने सूचना के प्रसार के लिए एमओईएस द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख किया तथा  आशा व्यक्त करते हुए कहा कि मौसम पूर्वानुमान के लिए जारी की गई एसएमएस सुविधा से अगले साल तक एक करोड़ किसानों के लाभान्वित होंने की उम्मीद है। उन्होंने आग्रह करते हुए कहा कि सेवाओं में लगातार हो रहे सुधार और उपग्रह अवलोकन सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए हमें इस दिशा में आवश्यक रूप से उपयोगी कदम उठाने चाहिए।

श्री वी. वेंकटचलम्, अपर सचिव, कृषि और सहकारिता विभाग (डैक) ने फसल प्रबंधन में मौसम पूर्वानुमान की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फसल प्रबंधन के क्षेत्र में मौसम पूर्वानुमान की उपयोगिता और भी अधिक बढ़ जाती है क्योंकि जून व जुलाई महीने तथा फसल प्रबंधन के सूक्ष्म स्तर पर भविष्यवाणियों में हर घंटे और अधिक सटीकता की आवश्यक होती है।

इससे पूर्व डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग तथा महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कहा कि किसानों के लिए बीज की सूचना को अति महत्वपूर्ण माना जाता है। किसान इस बारे में और अधिक सटीक जानकारी के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की इस दिशा में बहुत सी उपलब्धियां है लेकिन अभी किसानों के कल्याण के लिए बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर बल देते हुए कहा कि सभी संबंधित विभागों को किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक व्यवस्थित तंत्र तैयार करने का प्रयत्न करना चाहिए।

इस अवसर पर डॉ. बी. पी. यादव, निदेशक, मौसम विज्ञान संबंधी विभाग और डॉ. ए. के. सिंह, उप-महानिदेशक (एनआरएम), आईसीएआर भी उपस्थित थे।

आईसीएआर, इसरो, आईएसआरओ और डैक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस इंटरफेस बैठक में आईसीएआर, इसरो, आईएसआरओ और डैक के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

(स्रोत- एनएआईपी सब-प्रोजेक्ट मास-मीडिया मोबिलाइजेशन, दीपा)