संयुक्त प्रयास से ही संभव है खाद्य सुरक्षा

30वें विश्व खाद्य दिवस समारोह का आयोजन

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2010

‘भारत में हर पांच में से दो बच्चे कम वजन से ग्रसित हैं। ऐसे माहौल में भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में विकसित करना चुनौतीपूर्ण है। हम सभी को इस दिशा में गम्भीरता से प्रयास करने की आवश्यकता है।’ यह कहना है प्रो. वी. एल. चोपड़ा, पूर्व सदस्य, योजना आयोग, भारत सरकार का। वे संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन, एफएओ के भुखमरी से लड़ने के लिए विश्वभर में छेड़े गए अभियान विश्व खाद्य दिवस समारोह का उद्घाटन कर रहे थे, जिसका इस वर्ष का नारा ‘भूख के विरूद्ध एकजुटता’ है।

30वें विश्व खाद्य दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्घाटन भाषण में प्रो. चोपड़ा ने विश्व खाद्य दिवस के आरम्भ होने की प्रक्रिया की विस्तार से चर्चा की तथा साथ ही उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा पूरे विश्व के सामने एक गम्भीर समस्या है। यदि हमें इससे निजात पाना है तो हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे, तभी हम इस दुश्मन पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में संविधान में कही बातों पर जोर डालते हुए अनुच्छेद 21 (मौलिक अधिकार) और अनुच्छेद 47 (नीति निदेशक तत्व) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्व खाद्य दिवस केवल एक दिवस मात्र नहीं है जिस दिन हम बैठक और चर्चाएं करें। इस दिशा में काफी गम्भीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।

इससे पूर्व डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग तथा महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अतिथियों का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में डॉ. अय्यप्पन ने कहा कि विश्व इस बात से चकित है कि हिंदुस्तान अब तक किस प्रकार से 118 करोड़ की जनसंख्या को हर दिन खाना खिलाने में सफल रहा है। लेकिन आने वाले समय के लिए यह एक चुनौती है, जिसके लिए हमें काफी काम करना है। उन्होंने दूसरी हरित क्रांति काी आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विश्व की इतनी बड़ी जनसंख्या के भरण-पोषण के लिए हमें दूसरी हरित क्रांति की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने विश्व भर में जलवायु परिवर्तन के गम्भीर परिणामों की चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की तथा जैव-विविधता की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने इस दिशा में भारत सरकार द्वारा जारी की गई योजनाओं की भी सराहना की।

डॉ. अय्यप्पन ने खाद्य समस्या से निपटने के लिए मार्केटिंग की महत्ता को दर्शाता हुए कहा कि हमें इसके लिए बीज से बाजार तक का एप्रोच साथ लेकर चलना होगा। इस अवसर पर उन्होंने विजन-2030 की व्याख्या की भी व्याख्या की और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रमुख बताया।

डॉ. सी. डी. मायी, अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल ने अपने उद्बोधन में खाद्य एवं कृषि संगठन के इस वर्ष के नारे ‘भूख के विरूद्ध एकजुटताश् पर जोर देते हुए कहा कि समाज के इस सबसे बड़ी समस्या का समाधान एक साथ मिलकर कार्य करके ही संभव है। उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता नॉरमन बोरलॉग की एक उक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि हम भूखे पेटों के रहते एक शांतिपूर्ण विश्व नहीं बना सकते। हमें जरूरत है एक बिलियन हस्ताक्षरों की लेकिन यह स्याही से नहीं, बल्कि खून-पसीने से होनी चाहिए।

इस अवसर पर डॉ. राजीव चंद्रन, प्रधान अधिकारी, यूएनआईसी ने संयुक्त राष्ट्र संध के महासचिव बान-की-मून का संदेश पढ़ा। वहीं डॉ. गोपी घोष, सहायक निदेशक, एफएओ, भारत ने एफएओ के महानिदेशक डॉ. जैक्स डूफ का संदेश पढ़ा।

यह विश्व खाद्य दिवस समारोह कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

(स्रोत- एनएआईपी सब-प्रोजेक्ट मास-मीडिया मोबिलाइजेशन, दीपा)