‘हैदराबाद हलीम’ ने पाया भौगोलिक संकेतक प्रमाणीकरण

राष्ट्रीय मांस अनुसंधान केंद्र का सराहनीय प्रयास

हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)

  Dr. N. Kondaiah, Director, National Research Centre on Meat speaking in the Geographical Indication Certificate presentation ceremony on 04th September 2010 in Hyderabad (Sitting from the left Mr. Subhodh, IP Consultant, Andhra Pradesh Technology Development & Promotion Centre, Mr. Majeed, President, Hyderabad Haleem Makers’ Association; Dr. N. Kondaiah, Director, National Research Centre on Meat; Mr. Ravi. IP Consultant) ‘हैदराबाद हलीम’ मांस का एक अनूठा उत्पाद है, जो हैदराबाद क्षेत्र में सदियों से रमजान के दौरान तैयार किया जाता है। अपने अनुपम स्वाद और विविधता के कारण यह भारत के विभिन्न राज्यों और विश्व के विभिन्न देशों विशेष रूप से इस्लामिक देशों में काफी लोकप्रिय है। इसकी अनोखी भौगोलिक विशिष्टता को देखते हुए ‘हैदराबाद हलीम मेकर्स एसोसिएशन’ ने भौगोलिक संकेतक प्रमाणीकरण के लिए आवेदन किया, जो बौद्धिक संपदा का एक रूप है। भौगोलिक संकेतक उन उत्पादों को दिया जाता है जो अनोखे गुण वाले और क्षेत्र विशेष में तैयार किए गए हों। भौगोलिक संकेतक आमतौर पर एक ऐसा नाम है जो गुणवत्ता की गारंटी देने के साथ-साथ आवश्यक रूप से अपने उद्भव स्थान, क्षेत्र और देश आदि की विशेषता को पारिभाषित करता है।

हलीम के परीक्षण, संरचना और पोषक मूल्य का विवरण प्रदान करने के लिए हैदराबाद हलीम मेकर्स एसोसिएशन और बौद्धिक संपदा सलाहकार ने राष्ट्रीय मांस अनुसंधान केंद्र, हैदराबाद से संपर्क किया। केंद्र के एक महत्वपूर्ण प्रकाशन ने भी ‘हैदराबाद हलीम’ को इस भौगोलिक संकेतक प्रमाणीकरण को प्र्राप्त करने में सहायता की। ‘हैदराबाद हलीम’ भौगोलिक संकेतक प्रमाणीकरण प्राप्त करने वाला भारत का पहला मांस उत्पाद है। श्री पी. एच. कुरियन, महानियंत्रक, पेटेंट, डिजाइंस, ट्रेडमाक्र्स और पंजीयक, भौगोलिक संकेतक ने 4 अगस्त 2010 को श्री मजीद, अध्यक्ष, हैदराबाद हलीम मेकर्स एसोसिएशन को भौगोलिक संकेतक प्रमाणीकरण प्रदान किया। इस अवसर पर कुरियन ने कहा कि भौगोलिक संकेतक प्रमाणीकरण उस उत्पाद को दिया जाता है, जो अनोखा हो और देश के एक विशिष्ट क्षेत्र में तैयार किया गया हो। यह पेटेंट नहीं है, जो आविष्कारों के लिए दिया जाता है। हलीम निर्माताओं ने दावा कि यह स्वादिष्ट खाद्य एक विशेष प्रक्रिया से राज्य की राजधानी में दशकों से तैयार किया जाता रहा है। डॉ. एन. कोंडाइया, निदेशक, राष्ट्रीय मांस अनुसंधान केंद्र ने भौगोलिक संकेतक के महत्व को बताते हुए इसका ‘हैदराबाद हलीम’ के विपणन के अवसर को बढ़ाने में महत्व को मीडिया के समक्ष रखा। श्री मजीद ने आशा व्यक्त की कि इस नए प्रमाणीकरण से हलीम के विपणन में वृद्धि होगी और यह दुनिया में और भी अधिक लोकप्रिय होगा।


(स्रोत- मास मीडिया मोबलाइजेशन सब-प्रोजेक्ट, एनएआईपी, दीपा और राष्ट्रीय मांस अनुसंधान केंद्र, हैदराबाद )