विकास और प्रौद्योगिकी मुद्दे पर विचार-विमर्श

पूर्वोत्तर क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य विभाग और आईसीएआर की बैठक

झरनापानी/नगालैंड, 7 अगस्त, 2010

केवीके और पूर्वोत्तर क्षेत्र के पशुपालन, डेयरी और मत्स्य विभाग के अधिकारियों तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों के बीच शनिवार को राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र, मिथुन, झरनापानी, नगालैंड में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें केवीके और राज्य पशुपालन तथा मत्स्य विभाग के बीच विकास और परिवर्तन के क्षेत्र विषय पर चर्चा हुई। यह बैठक मुख्यतः भागीदारों के प्रौद्योगिकी मुद्दे पर केंद्रित था जिसका संबंध पशुपालन और मत्स्यिकी क्षेत्र में विकास से था।

बैठक के मुख्य अतिथि और नगालैंड सरकार के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा मंत्री टी. आर. जेलियांग ने इस राज्य में पहली बार इस तरह का आयोजन करने के लिए आयोजन सामिति की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नगालैंड में मांस का उत्पादन पर्याप्त नहीं है। लगभग 40 प्रतिशत लोगों के जरूरत की आपूर्ति आयात के द्वारा की जाती है। अतः यहां इस समस्या से निपटने और पशु मांस की उत्पादकता में वृद्धि के लिए विशेष रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने अभी हाल में ही बने नगालैंड के तीन नए जिलों में तीन नए केवीके की स्थापना पर भी जोर दिया। मंत्री ने सुझाव देते हुए कहा कि बेहतर नस्लों को तैयार करने के लिए नीति बनानी चाहिए और तेजी से बढ़ने वाली सूअर की नस्लें, आदर्श डेयरी और सूअर के लिए अलग से गांव, बीमारियों को पहचानने के लिए प्रयोगशाला और औषधालयों की संख्या बढ़ाई जाए। इसके साथ ही कृषि विस्तार के कार्यक्रम किए जाएं और गुणवत्तापूर्ण प्रोटीनयुक्त मक्का उत्पादन बढ़ाए जाए। ऐसा करने से क्षेत्र के किसानों की अर्थिक स्थिति बदल सकती है।

बैठक की अध्यक्षता दिलीप रथ, संयुक्त सचिव, पशु पालन, डेयरी एवं मत्स्यिकी विभाग, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के मवेशियों, मुर्गीपालन और सूअर आबादी में क्रमशः 8, 10 और 38 प्रतिशत का योगदान देता है लेकिन यह अभी भी आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस क्षेत्र में इन प्रजातियों के विकास के लिए कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में कमियां हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य क्षेत्र समृद्ध रणनीति बनाने पर भी जोर दिया।

पूर्वोत्तर क्षेत्रों के सभी आठ राज्यों के केवीके और उसके अधिकारियों ने समूह चर्चा के माध्यम से पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में सुधार के लिए कार्य योजना पर चर्चा की।

इस बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों जैसे नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम, मणिपुर, असम और मेघालय में स्थित विभिन्न केवीके के अधिकारियों, पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग, पूर्वोत्तर क्षेत्र से मत्स्य विभाग ने भारत सरकार के पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

(स्रोत: एनएआईपी सब-प्रोजेक्ट मास-मीडिया मोबिलाइजेशन, दीपा और एनआरसी, मिथुन, नगालैंड)