कृषि विज्ञान केन्द्र, जालोर में मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस

जालोर, 5 जून , 2012

कृषि विज्ञान केन्द्र, जालोर में मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस कृषि विज्ञान केन्द्र, जालोर में 5 जून को इस साल का विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री. देवजी एम. पटेल, संसद सदस्य ने कहा कि भारत की कुल जनसंख्या के 58 प्रतिशत लोगों की आजीविका कृषि से है। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र, अनुसंधान केन्द्रों और राज्य के कृषि विभाग को संयुक्त रूप से जिले में कृषि के विकास को गति प्रदान करने के लिए काम करना चाहिए। श्री पटेल ने कृषि विज्ञान केन्द्र को किसानों के लिए नई कृषि तकनीक सीखने की पाठशाला और उनकी आजीविका एवं सुरक्षा में सुधार लाने का माध्यम बताया। उन्होंने प्रत्येक पंचायत समिति में इस तरह के शिविरों के आयोजन किए जाने की बात भी कही।

कृषि विज्ञान केन्द्र, जालोर में मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवसडा. वाई वी सिंह, क्षेत्रीय परियोजना निदेशालय, क्षेत्र VI के क्षेत्रीय परियोजना निदेशक, ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र, राज्य सरकार द्वारा संचालित विस्तार विभागों से अलग भूमिका रखते हैं। केवीके ज्ञान संसाधन केंद्रों के रूप में जिलों में काम कर रहे हैं जो किसानों के खेतों पर तकनीकी सहायता द्वारा प्रदर्शन आयोजित करते हैं। अब किसानों के विकास के लिए वैज्ञानिकों को किसानों के साथ मिलकर काम करने और उनकी समस्याओं का हल करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवीके के कुछ केन्द्रों को विशेष रूप से काम करना होगा ताकि वे कृषि विज्ञान केन्द्रों के समूह में अग्रणी केंद्र के रूप में कार्य कर सकें।

डॉ. पी.एन. कल्ला, निदेशक, शिक्षा विस्तार निदेशालय, स्वामी केश्वानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने कहा कि मूंग और सेम के बीजों की अधिक उपज देने वाली किस्में किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं जिससे पारंपरिक किस्म के बीजों की जगह यह नए बीज उपयोग में लाए जा सकें। उन्होंने कहा कि नैदानिक ​​मोबाइल वैन सभी 13 पंचायत समिति में एक महीने तक मिट्टी और पौधों के नमूने का विश्लेषण करने के लिए और पशुओं के इलाज पर ध्यान देने के लिए संचालित की जाएगी।

श्री चुनी लाल सैनी, जिला कलेक्टर और श्री पी. आर. पंडित, जिला के मुख्य अधिकारी, ने जिले में किसानों के लाभ के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला। किसान, कृषक महिलाओं और लगभग 50 कृषि विज्ञान केन्द्र, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और संबंधित विभागों के कृषि अधिकारियों ने बड़ी संख्या में इस आयोजन में भाग लिया।

(स्रोत: क्षेत्रीय परियोजना निदेशालय, क्षेत्र VI, जोधपुर, राजस्थान)