पूसा कृषि विज्ञान मेले में महिला सशक्ती करण और खाद्यान्न एवं बागवानी फसलों पर तकनीकी सत्र

4 मार्च 2011, नई दिल्‍ली

पूसा कृषि विज्ञान मेला में आज भारी संख्या में किसानों ने भाग लिया। आज खेतिहर महिला सशक्‍तीकरण कार्यशाला के साथ-साथ दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कृषि में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया गया।

पहले तकनीकी सत्र में योजना आयोग के कृषि सलाहकार डॉ. वी.वी. सदामते मुख्‍य अतिथि थे। इस सत्र में किसान भाइयों और महिलाओं में स्‍वयं-सहायता समूह बनाने के फायदे तथा उनके बारे में विस्‍तृत जानकारी दी गई। डॉ. सदामते ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वयं सहायता समूहों के लिए किए गए प्रावधानों का जिक्र किया तथा 12वीं पंचवर्षीय योजना की रूपरेखा का भी जिक्र किया। इस मौके पर कृषि में महिलाओं के बढ़ते हिस्‍से को और अधिक प्रभावी बनाने पर मंत्रणा की गई।

दोपहर बाद के सत्र में फल-फूल सब्जियों तथा बागवानी को किस तरह से अधिक आय और उत्‍पादन बढ़ाने में प्रयोग किया जा सकता है, इस पर चर्चा हुर्इ। इस सत्र में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भूतपूर्व उपमहानिदेशक डॉ. के.एल. चड्ढा ने बागवानी मिशन पर ज़ोर दिया तथा सरकारी और कृषि परिषद के द्वारा उठाए जा रहे बहुआयामी प्रसाधनों का जिक्र किया।

डॉ. बलराज सिंह ने संरक्षित खेती का समर्थन करते हुए कम लागत वाली तकनीक किसानों को अपनाने की बात कही। राजधानी के परिनगरीय क्षेत्रों में सब्‍जी उत्‍पादन बढ़ाने के लिए संरक्षित खेती ही केवल एक विकल्‍प बताते हुए प्रति 100 वर्ग मीटर में विभिन्‍न फसलों की आमदनी का आर्थिक विश्‍लेषण भी बताया गया। केवल आज के दिन मेले में कृषि उन्‍नत तकनीकी को देखने तथा बीज आदि खरीदने के लिए 50 हजार से ज्‍यादा किसानों, महिलाओं, उद्यमियों तथा कृषि हितधारकों ने भाग लिया।

इस तीन दिवसीय मेले का अयोजन हर वर्ष मार्च के महीने में सन 1972 से लगातार किया जा रहा है। इस मौके पर देश भर से कृषि हितधारक, नीति निर्धारक, वैज्ञानिक एक मंच पर इकट्ठा होकर कृषि विज्ञान और कृषि अनुसंधान के विषय में मंत्रणा करते हैं। इस मेले में 200 से ज्‍यादा कृषि के स्‍टॉल लगे हुए हैं जिसमें कृषि की छोटी-बड़ी सभी उन्‍नत तकनीकियों को दर्शाया गया है।