केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान का 53वां स्थापना दिवस समारोह

जोधपुर, 1 अक्टूबर 2012

केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर ने अपना 53वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. वी.एन. शारदा, सदस्य, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली ने “शुष्क क्षेत्रों में सूखा प्रबंधन की रणनीतियां” विषय पर स्थापना दिवस व्याख्यान दिया। उन्होंने पशुओं और मनुष्यों पर सूखे से पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए आकस्मिक योजना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने काजरी के वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न पारिस्थितिकियों के लिए शुष्क प्रौद्योगिकी के विकास के लिए किए गए प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया।

इस अवसर पर सम्मानित अतिथि के तौर पर डॉ. आर.पी. धीर, पूर्व निदेशक, काजरी ने रेगिस्तान वनीकरण स्टेशन से संस्थान के विकास के अपने संस्मरण साझा किए। डॉ. के.आर. सोलंकी, पूर्व सहायक महानिदेशक (कृषिवानिकी), आईसीएआर ने अपनी विशेष टिप्पणी देते हुए कहा कि संस्थान को समान लाभ को बढ़ावा देने के प्रयासों पर जोर देना चाहिए।   
डॉ. एम.एम. रॉय, निदेशक, काजरी ने संस्थान के महत्वपूर्ण उपलब्धियों और शुष्क क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। डॉ. रॉय ने ठंडे शुष्क क्षेत्रों के लिए लेह-लद्दाख में नए अनुसंधान स्टेशन की स्थापना के बारे में भी बताया।

केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान का 53वां स्थापना दिवस समारोहकेन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान का 53वां स्थापना दिवस समारोह

संस्थान के विकास में महत्वपूर्ण सहयोग देने के लिए काजरी के आठ कार्मिकों को पुरस्कार दिया गया। लेह में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र की स्थापना प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए श्री थिनलेस डावा, एसडीएओ को सम्मानित किया गया। काजरी के वैज्ञानिक डॉ. जे.सी. तिवारी, डॉ. जे.सी. तरफदार, डॉ. दीतेश माचीवाल और डॉ. वी.एस. राठौर को शुष्क क्षेत्र अनुसंधान में महत्वपूर्ण कार्य के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में चार तकनीकी बुलेटिन और शुष्क कृषि के विभिन्न पहलुओं पर दस पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. वाई.वी. सिंह, निदेशक, क्षेत्रीय परियोजना निदेशालय, जोन-VI और डॉ. ओ.पी. यादव, निदेशक, मक्का अनुसंधान निदेशायलय, नई दिल्ली भी उपस्थित थे।

इस समारोह में काजरी के सेवानिवृत्त कर्मियों के अतिरिक्त मुख्य संस्थान, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों के साथ-साथ अनेक सरकारी और गैर-सरकारी अधिकारियों ने भी भाग लिया।

(स्रोत: काजरी, जोधपुर)
(हिन्दी प्रस्तुति:एनएआईपी मास मीडिया प्रोजेक्ट, डीकेएमए)