माननीय राष्ट्रपति द्वारा विश्व कृषि वानिकी कांग्रेस का उद्घाटन एवं कृषि कर्मण पुरस्कार का वितरण

10 फरवरी 2014, नई दिल्ली

Shri Pranab Mukherjee, Hon'ble President of Indiaभारत के माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने 10 फरवरी 2014 को विज्ञान भवन में एक समारोह में विश्व कृषि वानिकी कांग्रेस-2014 (डब्ल्यूसीए-2014) का उद्घाटन किया और कृषि कर्मण पुरस्कार (2012-13) प्रदान किये।

उद्घाटन संबोधन, में माननीय राष्ट्रपति ने प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक में भारतीय समाज में वृक्षों के महत्व और उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खेतों को टिकाऊपन बनाए रखने में कृषि वानिकी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। पर्यावरण की दृष्टि से सतत् खाद्य उत्पादन प्रणाली में कृषि वानिकी उभरता हुआ एक प्रमुख क्षेत्र है। कृषि वानिकी प्रणाली खाद्य, ईंधन और रेशे का उत्पादन और पोषण सुरक्षा में सहयोग देती है। इससे फल, ईंधन, रेशा, इमारती लकड़ी आदि प्राप्त कर किसान लाभदायकता बढ़ा सकते हैं। कृषि वानिकी प्रणाली से आजीविका को सुचारू रखने, वनों की कटाई रोकने, जैव विविधता बढ़ाने, भू-क्षरण रोकने, जल संसाधनों को बनाए रखने और कटाव रोकने में सहायता मिलती है।

श्री मुखर्जी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि वानिकी एक कारगर तरीका है इसलिए इस क्षेत्र में अधिक निवेश की भी संभावनाएं हैं। कृषि वानिकी पृथ्वी के 33 प्रतिशत भाग पर वनीकरण करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प भी है, जो अभी 25 प्रतिशत है। उन्होंने भा.कृ.अनु.प. द्वारा कृषि वानिकी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना और कृषि वानिकी पर राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र के माध्यम से किए जा रहे अनुसंधान कार्यों पर प्रकाश डाला।

World Congress on Agro-forestry 2014श्री मुखर्जी ने कहा कि कृषि वानिकी एक आशाजनक क्षेत्र है और संकीर्ण दृष्टिकोण की वजह से अब इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। कृषि वानिकी की तरक्की के लिए अपनी नीतियों में इसके उपाय करने पर मुझे प्रसन्नता हो रही है। मुझे बताया गया कि राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति का एक मसौदा तैयार कर लिया गया है। मुझे आशा है कि इसे जल्द ही अन्तिम रूप दे दिया जाएगा। कृषि वानिकी पर एक राष्ट्रीय मिशन शुरू करने भी योजना बनाई गई है जो इस क्षेत्र का संचालन कर रहे संबंधितों के बीच बेहतर समन्वय, एकरूपता और मिलजुलकर काम करने की संभावना सुनिश्चित करेगा।

माननीय राष्ट्रपति ने डब्ल्यूसीए-2014 की थीम पर बच्चों के लिए आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए।

World Congress on Agro-forestry 2014श्री शरद पवार, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, भारत सरकार ने अपने संबोधन कहा कि कृषि वानिकी भारत में सदियों से जिंदगी का अहम हिस्सा रही है। इसमें रोजगार सृजन, आजीविका, संसाधन संरक्षण, कृषि उत्पादन का अनुकूलन आदि करने की क्षमता है। कृषि वानिकी के व्यापक विकास में बाधा डालने वाले कारकों को दूर करने हेतु संसाधन जुटाने के लिए हमें शायद एक वैश्विक 'कृषि वानिकी परिवर्तन' की जरूरत है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली और विश्व कृषि वानिकी केन्द्र, नैरोबी अन्य भागीदारों के साथ मिलकर ऐसे कृषि वानिकी परिवर्तन के लिए तैयार हैं जो कृषि और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में, खासकर विकासशील देशों में 'सदाबहार क्रांति' को बढ़ावा देगा।

श्री पवार ने इस अवसर पर भा.कृ.अनु.प. की पत्रिका इंडियन फार्मिंग के विशेषांक एवं इंडियन जर्नल ऑफ एग्रो फोरेस्ट्री का विमोचन किया और इनकी प्रथम प्रति माननीय राष्ट्रपति को भेंट की।

World Congress on Agro-forestry 2014डॉ. एम. वीरप्पा मोइली, पर्यावरण एवं वन मंत्री, भारत सरकार ने भारतीय उपमहाद्वीप में वृक्षों के महत्व और उसकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सदियों से हम इन्हीं से भोजन, ईंधन, फल और इमारती लकड़ी प्राप्त कर रहे हैं। भारतीय किसान लाभप्रदता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सतत् कृषि की गतिशील प्रणाली के रूप में खेतों में पेड़ लगाते हैं। उन्होंने आशा जताई की आगामी राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति देश में कृषि वानिकी के लिए नए मार्ग प्रशस्त करेगी।

World Congress on Agro-forestry 2014डॉ. एंथोनी जे. सिमन्स, महानिदेशक, विश्व कृषि वानिकी केन्द्र, नैरोबी ने डब्ल्यूसीए-2014 की थीम 'जीवन के लिए वृक्ष: कृषि वानिकी का बढ़ता प्रभाव' के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विश्व कृषि वानिकी कांग्रेस का आयोजन दुनिया के इस हिस्से में होना जरूरी है क्योंकि कृषि वानिकी अन्य भागों की तुलना में इस भाग में ज्यादा लोगों का पोषण करती है। कृषि वानिकी हरित अर्थव्यवस्था के बजाय हरित समाज के लिए प्रयासरत है।

World Congress on Agro-forestry 2014इससे पूर्व डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भा.कृ.अनु.प. ने गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने आशा जताई कि सम्मेलन में अगले दो दशकों में कृषि वानिकी की रूपरेखा एवं दशा-दिशा पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस विकास पर कृषि वानिकी के वित्तीय, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों में तेजी लाने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगी।

World Congress on Agro-forestry 2014श्री आशीष बहुगुणा, सचिव, कृषि एवं सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार ने कृषि कर्मण पुरस्कारों का परिचय दिया जिनकी शुरुआत खाद्यान्न उत्पादन में राज्यों के मेधावी प्रयासों को पहचानने के लिए वर्ष 2010-11 में की गई थी। प्रगतिशील किसानों के लिए कृषि मंत्री का कृषि कर्मण पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2011-12 में की गई थी। माननीय राष्ट्रपति ने राज्यों के प्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों को कृषि कर्मण पुरस्कार 2012-13 प्रदान किए।

पांच दिवसीय (10-14 फरवरी 2014) डब्ल्यूसीए-2014 का आयोजन नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली; विश्व कृषि वानिकी केन्द्र, नैरोबी, केन्या; और भारतीय कृषि वानिकी सोसायटी (आईएसएएफ), झांसी द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। कांग्रेस की थीम 'जीवन के लिए वृक्ष: कृषि वानिकी का बढ़ता प्रभाव' रखी गई है। यह तीसरी कांग्रेस है। पहली कांग्रेस वर्ष 2004 में यूएसए के ओरलैंडो में और दूसरी कांग्रेस वर्ष 2009 में केन्या के नैरोबी में आयोजित की गई थी। भारत में कांग्रेस का यह पहला सत्र है।
कांग्रेस में 80 देशों के करीब 500 प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, टिकाऊ विकास के लिए अग्रणी व्यवसायियों, गैर सरकारी संस्थाओं, विश्व भर से कृषक समूहों और युवा समूहों सहित करीब 1200 लोग शामिल हुए।

World Congress on Agro-forestry

डॉ. आलोक कुमार सिक्का, उपमहानिदेशक (एनआरएम), भा.कृ.अनु.प. ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

(स्रोतः एनएआईपी मास मीडिया प्रोजेक्ट, डीकेएमए, आईसीएआर)