विदेश मंत्री ने डब्ल्यूसीए-2014 के समापन समारोह को संबोधित किया

13 फरवरी 2014, नई दिल्ली

Shri Salman Khurshid, Minister of External Affairs, Government of Indiaश्री सलमान खुर्शीद, विदेश मंत्री, भारत सरकार ने 13 फरवरी 2014 को नई दिल्ली में विश्व कृषि वानिकी कांग्रेस (डब्ल्यूसीए-2014) के समापन समारोह को संबोधित किया। वैश्विक महत्व के इस आयोजन के लिए विश्व कृषि वानिकी केन्द्र और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रयासों की सराहना करते हुए श्री खुर्शीद ने पोषण सुरक्षा के लिए लोगों से अपने घर के आसपास फलों और औषधीय पेड़-पौधे लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत के संदर्भ में सामयिक है क्योंकि आज हम अपनी खाद्य सुरक्षा को टिकाऊ बनाये रखने के लिए हरित क्रांति की सफलता से भी आगे सोच रहे हैं। वातावरण से कार्बन पृथक्करण की अपनी अनोखी क्षमता के कारण वृक्ष जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हमारी सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

Dr. S. Ayyappan, Secretary, DARE and DG, ICARजीवन में वृक्षों का महत्व बताते हुए श्री खुर्शीद ने कहा कि वन पृथ्वी और वातावरण को सुंदर बनाते हैं। इससे मनुष्य का जीवन भी सुंदर हो जाता है। आज हमें इसी की जरूरत है। आज वनों के लिए नई भूमि उपलब्ध कराने की जरूरत है जहां कृषि वानिकी अपनी पूरी क्षमता के साथ विकसित हो सके। अपनी आने वाली पीढ़ी को देने के लिए हमें खुद कृषि वानिकी को अपनाना होगा और खुद ही अपने आसपास पेड़-पौधे वातावरण को शुद्ध रखना होगा। इस तरह हम करोड़ों पेड़ लगा सकेंगे और इस काम के लिए आने वाली पीढ़ी हमें धन्यवाद देगी।

इससे पहले डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भा.कृ.अनु.प. ने श्री खुर्शीद का स्वागत किया और उन्हें विश्व कृषि वानिकी कांग्रेस में हुए विचार-विमर्श और उसके परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कांग्रेस के उद्देश्यों और भारत के संदर्भ में इसके महत्व के बारे में भी बताया। कांग्रेस का उद्घाटन भारत के माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने 10 फरवरी, 2014 को विज्ञान भवन में एक समारोह में किया था।

इस अवसर पर डॉ. एंथोनी जे. सिमन्स, महानिदेशक, विश्व कृषि वानिकी केन्द्र, नैरोबी और डॉ. आलोक कुमार सिक्का, उपमहानिदेशक, (एनआरएम) भी उपस्थित रहे।

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डब्ल्यूसीए-2014 का आयोजन नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली; विश्व कृषि वानिकी केन्द्र, नैरोबी, केन्या; और भारतीय कृषि वानिकी सोसायटी (आईएसएएफ), झांसी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इसकी थीम ‘जीवन के लिए पेड़ः कृषि वानिकी का बढ़ता प्रभाव’ रखी गई थी। यह तीसरी कांग्रेस थी। पहली कांग्रेस वर्ष 2004 में यूएसए के ओरलैंडो में और दूसरी कांग्रेस वर्ष 2009 में केन्या के नैरोबी में आयोजित की गई थी। भारत में कांग्रेस का यह पहला सत्र था।

कांग्रेस में 80 देशों के करीब 500 प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, टिकाऊ विकास के लिए अग्रणी व्यवसायियों, गैर सरकारी संस्थाओं, विश्व भर से कृषक समूहों और युवा समूहों सहित करीब 1200 लोग शामिल हुए।

डॉ. रवि प्रभु, उपमहानिदेशक (अनुसंधान), विश्व कृषि वानिकी केन्द्र ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

(स्रोतः एनएआईपी मास मीडिया प्रोजेक्ट, डीकेएमए, आईसीएआर)