‘पादप, रोगजनक तथा मानव’ पर छठा अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन

23 फरवरी, 2016, नई दिल्‍ली

पद्म विभूषण डॉ. प्रो. वी.एल. चोपड़ा, पूर्व सदस्‍य, योजना आयोग और सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने आज यहां ’’मानवजाति के हित में पादप रोगविज्ञान में चुनौतियां’’ विषय के साथ ‘’पादप, रोगजनक और मानव’’ पर छठे अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. चोपड़ा ने तीन शब्‍दों (पादप, रोगजनक और मानव) ( 3Ps (Plant, Pathogens, People) ) पर बल दिया जो कि आपस में एक दूसरे पर आश्रित हैं और एक जटिल परिस्थिति पैदा करते हैं। इन सभी तीनों को जीने का अधिकार है और लोग अथवा मानव को रोगजनकों का उन्‍मूलन नहीं करना चाहिए वरन् उन्‍हें साथ में बने रहने देना चाहिए। उन्‍होंने इस बात पर बल दिया कि कृषि क्षेत्र में पादप रोगविज्ञान एक अति महत्‍वपूर्ण विषय है। इसके द्वारा सीमित उपलब्‍ध संसाधनों पर हमारे किसानों द्वारा उत्‍पन्‍न खाद्य को बचाया जा सकता है।

6th International Conference on 'Plant, Pathogens and People'6th International Conference on 'Plant, Pathogens and People'6th International Conference on 'Plant, Pathogens and People'

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने इस तथ्‍य की ओर संकेत किया कि रोगजनक, पौधों और मनुष्‍य के बीच खड़े हैं। उन्‍होंने वैज्ञानिकों से रोगजनकों के सभी उपलब्‍ध स्‍ट्रेनों जिनके बारे में अभी ज्ञात नहीं है, के बारे में जानकारी हासिल करने का अनुरोध किया ताकि उनका प्रबंधन सही तरीके से किया जा सके।

डॉ. एन.के. कृष्‍ण कुमार, उपमहानिदेशक (बागवानी विज्ञान), भाकृअनुप ने अपने संबोधन में कीटनाशकों के विरूद्ध पादप रोगजनकों के प्रतिरोधिता प्रबंधन की अवधारणा पर बल दिया। साथ ही उन्‍होंने संधारणीयता को कहीं अधिक महत्‍व देते हुए फसलों पर नाशीजीवों और रोगों का प्रबंधन करने वाली परपोषी पादप प्रतिरोधी रणनीतियों को मजबूती प्रदान करने का सुझाव दिया।

डॉ. सी.डी. मायी, पूर्व अध्‍यक्ष, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल ने वैज्ञानिकों से दलहन और तिलहन अनुसंधान पर कहीं अधिक बल देने का आह्वान किया। अनार की जीवाण्विक अंगमारी तथा कवकीय मुरझान, कपास पत्‍ती घूर्णन, नारियल मुरझान आदि जैसे रोगों को यथाशीघ्र प्रबंधन रणनीतियों के बारे में कहीं अधिक महत्‍व दिया जाए।

इस अवसर पर प्रतिष्ठित पादप रोगविज्ञानियों को सम्‍मानित किया गया और अतिथिगणों द्वारा इंडिया फाइटोपैथोलॉजीकल सोसायटी के प्रकाशनों को जारी किया गया।

इस पांच दिवसीय (23 – 27 फरवरी, 2016) सम्‍मेलन में कुल 36 देशों के लगभग 700 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस सम्‍मेलन का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा इंडिया फाइटोपैथोलॉजीकल सोसायटी द्वारा संयुक्‍त रूप से किया गया।

(स्रोत : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली)