महानिदेशक, भाकृअनुप ने मृदा कार्बन को टिकाऊ बनाने वाली कृषि क्रियाओं पर बल दिया

24 फरवरी, 2016, भोपाल

DG, ICAR Emphasized on Practices for Sustaining Soil Carbonडॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने आज यहां भाकृअनुप – भारतीय मृदा विज्ञान संस्‍थान (IISS), भोपाल का दौरा किया और संस्‍थान के वैज्ञानिकों और स्‍टॉफ को संबोधित किया।

अपने संबोधन में डॉ. महापात्र ने इस बात पर बल दिया कि उत्‍पादकता में गिरावट और मृदा स्‍वास्‍थय में अपघटन एक प्रमुख चिन्‍ता का विषय है। उन्‍होंने कहा कि दीर्घावधि में मृदा स्‍वास्‍थ्‍य का अपघटन किए बिना उत्‍पादकता को टिकाऊ बनाये रखने में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन वैज्ञानिकों को एक प्रमुख भूमिका निभाने की जरूरत है। डॉ. महापात्र ने प्रमुख मृदा किस्‍मों के लिए मृदा जैविक कार्बन को बनाये रखने में सर्वश्रेष्‍ठ प्रबंधन पद्धतियों की महत्‍ता पर बल दिया। उन्‍होंने भाकृअनुप – भारतीय मृदा विज्ञान संस्‍थान (IISS), भोपाल द्वारा की गई उपलब्धियों  विशेषकर मृदा उर्वरता मानचित्र तैयार करने, आईएनएम पैकेज विकसित करने और खेत पर ही मिट्टी की जांच करने वाली मिनी लैब ‘मृदापरीक्षक’ को विकसित करने की सराहना की।

महानिदेशक महोदय के साथ डॉ. जे.एस. संधू, उपमहानिदेशक (फसल विज्ञान), डॉ. पी.के. घोष, निदेशक, भाकृअनुप – भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्‍थान, झांसी और डॉ. एन.पी. सिंह, भाकृअनुप – भारतीय दलहन अनुसंधान संस्‍थान, कानपुर थे।

इससे पहले, डॉ. अशोक के. पात्रा, निदेशक, भाकृअनुप – भारतीय मृदा विज्ञान संस्‍थान, भोपाल ने अतिथिगणों का स्‍वागत करते हुए संस्‍थान की प्रमुख गतिविधियों के बारे में संक्षिप्‍त जानकारी दी और ‘’स्‍वस्‍थ जीवन के लिए स्‍वस्‍थ मृदा’’ की महत्‍ता पर बल दिया।

(स्रोत : भाकृअनुप – भारतीय मृदा विज्ञान संस्‍थान, भोपाल)