भाकृअनुप – अखिल भारतीय समन्वित फल अनुसंधान परियोजना पर समूह चर्चा

6 मार्च, 2016, लुधियाना

भाकृअनुप – अखिल भारतीय समन्वित फल अनुसंधान परियोजना की तीसरी समूह चर्चा का आयोजन दिनांक 3 – 6 मार्च, 2016 को पंजाब कृषि विश्‍वविद्यालय, लुधियाना में किया गया।

डॉ. एन. के. कृष्‍ण कुमार, उपमहानिदेशक (बागवानी विज्ञान), भाकृअनुप ने अपने उद्घाटन सम्‍बोधन में उत्‍पादन के मामले में भारतीय कृषि में पंजाब राज्‍य की स्थिति और महत्‍व बताया । साथ ही उन्‍होंने सामान्‍यत: भारतीय राज्‍यों और विशेषकर पंजाब राज्‍य के लिए विजन 2050 और 2030 के महत्‍व पर प्रकाश डाला। उन्‍होंने प्रत्‍येक कृषि जलवायु जोन में टिकाऊपन के आधार पर उत्‍पादकता में वृद्धि करने के महत्‍व पर बल दिया।

Group Discussion of the ICAR-All India Coordinated Research Project on Fruits

डॉ. कुमार ने यह सुझाव भी दिया कि संकलित बाजार बुद्धिचातुर्य के आधार पर फलों में कटाई उपरांत नुकसान में कमी लाने के लिए उपाय किए जाएं। रसायन मुक्‍त कृषि उत्‍पादों को सुनिश्चित करने की जरूरत पर प्रकाश डालते हुए डॉ. कुमार ने जैव संचयन में अध्‍ययन, इकोलॉजीकल सिद्धान्‍तों का अनुप्रयोग तथा सामान्‍यत: सभी राज्‍यों और विशेषकर सिक्किम तथा केरल में  जैविक बागवानी के लिए कृषि प्रणाली के पैकेज की महत्‍ता पर बल दिया।

उन्‍होंने नींबूवर्गीय फसलों में पर्याप्‍त उत्‍पादन होने के बावजूद वांछित सीमा तक प्रसंस्‍करण की कमी के कारणों की जांच करने का अनुरोध किया और मौसम में परिवर्तनों के पूर्वानुमान के आधार पर फलों के विभिन्‍न उत्‍पादन पहलुओं पर समय से परामर्श सेवा की जरूरत को ध्‍यान में रखकर केवल छायादार नेट और पॉलीहाउस परिस्थितियों में अच्‍छी गुणवत्‍ता वाली रोपण सामग्री के उत्‍पादन पर एक नीतिगत निर्णय करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्‍होंने मार्कर सहायतार्थ चयन का उपयोग करके गुण विशिष्‍ट लक्षणवर्णन पूरा करते हुए तथा जीएम मूलवृन्‍तों का विस्‍तार करके और भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्‍यूरो, नई दिल्‍ली में बागवानी फसलों की क्‍लोनल रिपोजिट्री का उपयोग करके एक नीतिगत निर्णय  करने का अनुरोध किया।

श्री सुरेश कुमार, आईएएस, अपर मुख्‍य सचिव, कृषि, जल आपूर्ति और स्‍वच्‍छता विभाग, पंजाब सरकार ने पंजाब में अनाज फसलों से फलदार और सब्‍जी फसलों की ओर फसल विविधीकरण करने की जरूरत बताई।  

कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए पंजाब कृषि विश्‍वविद्यालय, लुधियाना के कुलपति डॉ. बलदेव सिंह ढिल्‍लों ने वांछित गुणों के लिए प्रजनन, किस्‍म विकास, मूलवृन्‍त प्रजनन के लिए उपलब्‍ध जननद्रव्‍य का दोहन करने, कैनोपी प्रबंधन को सुनिश्चित बनाने, फलों के पोषणिक मान में सुधार करने तथा एक खेत जीनबैंक और संगरोध इकाई का रख रखाव करने के महत्‍व पर बल दिया।

डॉ. प्रकाश पाटिल, परियोजना समन्‍वयक (फल) ने नौ फलदार फसलों नामत: आम, सिट्रस, केला, अमरूद, लीची, अंगूर, पपीता, चीकू तथा कटहल पर देशभर में फैले 42 केन्‍द्रों पर किए गए कार्य की प्रगति रिपोर्ट प्रस्‍तुत की। इस चार दिवसीय कार्यक्रम में, वर्ष 2014-15 की अनुसंधान उपलब्धियों और अखिल भारतीय समन्वित फल अनुसंधान परियोजना की वर्ष 2016-17 के लिए अधिदेशित फलदार फसलों के लिए अनुसंधान कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया।

भाकृअनुप मुख्‍यालय तथा राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों के वरिष्‍ठ अधिकारियों; भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्‍थानों के निदेशकों,  संभागाध्‍यक्षों तथा वैज्ञानिकों और 165 प्रतिनिधियों ने समूह चर्चा  में भाग लिया।

समूह चर्चा के उद्घाटन सत्र में चार प्रकाशनों – ‘’इन्‍सैक्‍ट एंड माइट पेस्‍ट्स ऑफ सिट्रस इन इंडिया’’, इन्‍टेग्रेटिड पेस्‍ट मैनेजमेंट ऑफ बनाना एंड प्‍लान्‍टैन (5 स्‍थानीय भाषाओं में), ‘’नींबू वर्गीय फलों के  विभिन्‍न कीट एवं उनका प्रबंधन’’ और‘’किन्‍नू पंचांग’’ को जारी किया गया।

(स्रोत : परियोजना समन्‍वयक (फल), भाकृअनुप – भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्‍थान, बंगलुरू)