पासीघाट, अरूणाचल प्रदेश में मिथुन मेला एवं किसान जागरूकता कार्यक्रम

6thमार्च, 2016, पासीघाट, अरूणाचल प्रदेश

'Mithun Mela-cum-Farmers' awareness programme at Pasighat, Arunachal Pradeshभाकृअनुप – राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र, नगालैण्‍ड; पशु चिकित्‍सा एवं पशु पालन विभाग, अरूणाचल प्रदेश सरकार; तथा बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय, सीएयू, पासीघाट ने संयुक्‍त रूप से आज यहां तकिलालंग गांव में ‘मिथुन मेला व किसान जागरूकता कार्यक्रम’ का आयोजन किया।

श्री निनोंग इरिंग, माननीय लोकसभा सांसद ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए इस बात पर बल दिया कि मिथुन का वैज्ञानिक तरीके से पालन करने से न केवल किसानों की आजीविका में सुधार होगा वरन् इससे वनों के पुनरूद्धार में भी मदद मिलेगी। उन्‍होंने भारत में सर्वाधिक मिथुन जनसंख्‍या वाले अरूणाचल प्रदेश में एक मिथुन केन्‍द्र की स्‍थापना करने की आवश्‍यकता पर भी बल दिया।

श्री कलिंग मोयोंग, पासीघाट के विधायक तथा कार्यक्रम के विशिष्‍ट अतिथि ने किसानों के बीच जागरूकता पैदा करने में भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र द्वारा की गई पहल पर प्रसन्‍नता जताई। उन्‍होंने कहा कि मिथुन, अरूणाचल प्रदेश के  सामाजिक-आर्थिक जीवन का अभिन्‍न अंग और गौरव है।

डॉ. अभिजीत मित्रा, निदेशक, भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र, नगालैण्‍ड ने संस्‍थान के अधिदेशों के बारे में जानकारी देते हुए वैज्ञानिक तरीके से मिथुन का पालन करने पर जोर दिया।

प्रो. ए.के. पाण्‍डेय, डीन, सीएचएफ, पासीघाट; पशु चिकित्‍सा एवं पशु पालन विभाग के उप निदेशक; डॉ. टी. टकु, जिला पशु चिकित्‍सा अधिकारी; जे. पनोर तथा स्‍थानीय पंचायत नेताओं ने भी उद्घाटन कार्यक्रम में अपने विचार प्रकट किए।

जनजातीय उपपरियोजना के तहत एक सौ पचास सूअर के नवजात, एक मेडिसिन किट, तथा भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र में विकसित खनिज मिश्रण  ‘’मिथुन –मिन’’ को ग्रामीणों में  वितरित किया गया।

मेले में निकटवर्ती गांवों के किसानों द्वारा लाए गए सांड, मादा तथा बछड़ी/बछड़ा सहित लगभग 70 मिथुन पशुओं को प्रदर्शित किया गया। मेले में ही 58 मिथुन पशुओं को टीका लगाया गया।

इस मेले में भाकृअनुप के विभिन्‍न संस्‍थानों तथा सीएयू के तहत आने वाले कॉलेजों ने अपनी भागीदारी की।

इस मेले में लगभग 300 मिथुन किसानों ने भाग लिया।

(स्रोत : भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्‍द्र, नगालैण्‍ड)