‘पशु चिकित्सा एवं मात्स्यिकी विज्ञान से संबंधित कीट’ पर विचारोत्तेजक सत्र

2ndअगस्त , 2014, बेंगलुरू

डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने 'पशु चिकित्सा एवं मात्स्यिकी विज्ञान से संबंधित कीट' विषय पर एक दिवसीय विचारोत्तेजक सत्र का कृषि में महत्वपूर्ण कीटों पर राष्ट्रीय ब्यूरो (एनबीएआईआई) बेंगलुरू में 2 अगस्त 2014 को उद्घाटन किया।

डॉ. अय्यप्पन ने उद्घाटन भाषण में इस बात पर बल दिया कि विचारोत्तेजक सत्र के दौरान निम्न बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिएः

  • किसी एक पशु चिकित्सा संस्थान, संभवतः आईवीआरआई, इज्जतनगर को नोडल एजेंसी के तौर पर एनबीएआईआई की भागीदारी में पशु चिकित्सा विज्ञान से संबंधित कीटों की टैक्सोनोमी एवं उनके अभिलक्षणन का काम करना चाहिए।
  • किसी एक मात्स्यिकी संस्थान, अगर हो सके तो सीएमएफआरआई, कोच्चि को एनबीएआईआई के साथ नोडल संस्थान के रूप में मात्स्यिकी विज्ञान से संबंधित कीटों की टैक्सोनोमी एवं लक्षण वर्णन पर आधारित काम का दायित्व लेना चाहिए।
  • पशु विज्ञान से संबंधित खतरनाक कीटों एवं जलीय खरपतवारों के सुरक्षित नियंत्रण हेतु अणुओं (मॉलीक्यूल) की पहचान।
  • पशुओं एवं मछलियों से संबंधित एन्थ्रोपोड्स की पहचान मार्गदर्शिका

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इससे पूर्व, डॉ. अय्यप्पन एवं अन्य प्रतिभागियों का स्वागत एनबीएआईआई के निदेशक डॉ. अब्राहम वर्गीज द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में पशु विज्ञान से संबंधित कीटों की पहचान एवं उनके लक्षण वर्णन के काम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अब तक इस क्षेत्र में काफी सीमित काम हुआ है।

इस अवसर पर डॉ. सी. वासुदेवप्पा, कुलपति, यूएएचएस, शिमोगा; डॉ. एस. यतिराज, डीन, वेटेरिनरी कॉलेज, बेंगलुरू; डॉ. सी.ए. विरक्तमथ, अध्यक्ष, आरएसी, एनबीएआईआई; डॉ. एच. रहमान, निदेशक, एनआईवीईडीआई; डॉ. आर. वेंकटरमणन, संयुक्त निदेशक, आईवीआरआई और डॉ. जे.के. जेना, निदेशक, एनबीएफजीआर, लखनऊ के अलावा बैठक में विभिन्न पशु चिकित्सा एवं मात्स्यिकी संस्थानों/विश्वविद्यालयों से आए 40 से अधिक वैज्ञानिक ने भी भाग लिया।

(स्रोत: एनबीएआईआई, बेंगलुरू)