उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्रों में सूखे की स्थिति पर आकस्मिक योजना

2nd अगस्त , 2014, उमियम

उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के लिए भाकृअनुप के अनुसंधान परिसर, मेघालय में निक्रा के अंतर्गत एक दिवसीय 'जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम' का 2 अगस्त 2014 को उमियम में आयोजन किया गया।.

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में श्री डेनियल इंगली, निदेशक (बागवानी), मेघालय सरकार ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के लिए भाकृअनुप के अनुसंधान परिसर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम समय की आवश्यकता है और इससे कृषक समुदाय में जलवायु समुत्थानशील प्रौद्योगिकियों एवं सूखे के प्रभाव को न्यूनतम करने हेतु उपलब्ध आकस्मिक योजना के बारे में जागरूकता बढ़ेगी।

कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में संस्थान के निदेशक डॉ. एस.वी. नगाचन ने उपस्थित कृषकों को 'क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर' तकनीकों को अपनाने का सुझाव दिया ताकि सूखे के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान कृषकों को महत्वपूर्ण आदान जैसे पंप एवं कम लागत वाली प्लास्टिक पाइप, बीज, रोपण सामग्री, पशुधन हेतु विटामिन एवं खनिज मिश्रण आदि भी वितरित किये गये, जिनकी सहायता से वे सूखे जैसी स्थितियों की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।

Contingency Plan for Drought Like Situation in NEH Region Contingency Plan for Drought Like Situation in NEH Region Contingency Plan for Drought Like Situation in NEH Region .

जलवायु परिवर्तन की वर्तमान स्थितियों पर चिन्ता जताते हुए डॉ. एन.एस.ए. आजाद ठाकुर, प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, प्राकृतिक संसाधन प्रबंध विभाग ने यह बताया कि संस्थान द्वारा सूखे की वर्तमान स्थितियों से निपटने के लिए उपयुक्त आकस्मिक योजना तैयार की जा चुकी है और संस्थान द्वारा बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही हे। इस संबंध में आवश्यक सूचनाएं संबंधितों को एसएमएस तथा संस्थान के पोर्टल (www.kiran.nic.in) के माध्यम से प्रसारित की जा रही हैं।

इससे पूर्व, डॉ. ए.के. त्रिपाठी, प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष समाज विज्ञान विभाग ने बताया कि सूखे जैसी स्थिति से उत्पन्न समस्याओं का सामना करने में आकस्मिक योजनाओं के बारे में संबंधितों को जागरूक बनाना क्यों आवश्यक है।

डॉ. ए. वेंकटेश, प्रधान वैज्ञानिक (कृषि वानिकी) और इंचार्ज पीआई, निक्रा ने कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों का स्वागत किया तथा डॉ. ए.के. मोहंती, प्रधान वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) द्वारा समारोह के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव रखा गया।

इस कार्यक्रम में मेघालय के अधिकांश जिलों का प्रतिनिधित्व करते हुए 180 से अधिक कृषकों एवं महिला कृषकों ने हिस्सा लिया। इनके अलावा कृषि क्षेत्र में कार्यरत एनजीओ, राज्य कृषि प्रसार कर्मियों, मीडिया एजेंसियों तथा वैज्ञानिकों ने भी इसमें भाग लिया।

(स्रोतः उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के लिए भाकृअनुप का अनुसंधान परिसर, मेघालय)