केन्द्रीय कृषि मंत्रियों ने आईएआरआई और एनबीपीजीआर के अनुसंधान और नवोन्मेष की सराहना की

अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का उद्घाटन

2 जुलाई 2014, नई दिल्ली

श्री राधा मोहन सिंह, केन्द्रीय कृषि मंत्री, भारत सरकार ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली स्थित जल प्रौद्योगिकी केन्द्र (डब्ल्यूटीसी) में पर्यावरण अनुकूल अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर डॉ. संजीव कुमार बाल्यान, कृषि राज्यमंत्री, भारत सरकार और डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर और महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी उपस्थित थे।

 Union Ministers of Agriculture Appreciated Research and Innovation at IARI and NBPGR Union Ministers of Agriculture Appreciated Research and Innovation at IARI and NBPGR

माननीय मंत्रीगणों ने राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर) के राष्ट्रीय जीन बैंक का अवलोकन करते हुए भावी पीढ़ी के लिये जैव विविधता के संरक्षण के लिये किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। नाभिकीय अनुसंधान प्रयोगशाला (एनआरएल) और आईएआरआई के प्रायोगिक खेतों के निरीक्षण के दौरान माननीय मंत्रीगणों ने आधुनिकीकरण पर संतोष जताया। वे राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र के परिसर में स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संग्रहालय में नवोन्मेषी प्रदर्शनों से भी प्रभावित हुए।

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आईएआरआई के पुस्तकालय का दौरा करते हुए, श्री सिंह और डॉ. बाल्यान ने आईएआरआई के वैज्ञानिकों से बातचीत की। इस अवसर पर, डॉ. एच.एस. गुप्ता, निदेशक, आईएआरआई ने भारतीय कृषि में आईएआरआई के योगदान पर प्रस्तुति दी। श्री सिंह ने विशेष रुचि लेते हुए आईएआरआई द्वारा उठाए गये कदमों की सराहना की।

इससे पूर्व, डॉ. रविन्दर कौर, परियोजना निदेशक, डब्ल्यूटीसी ने बताया कि अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र, बिना किसी रसायन के आईएआरआई की रिहायशी कॉलोनी के अपशिष्ट जल का उपचार करेगा। उन्होंने बताया कि इस संयंत्र की क्षमता एक दिन में 2.2 मिलियन लीटर अपशिष्ट पानी का शोधन करने की है। इस उपचारित जल का प्रयोग परिसर के खेतों की सिंचाई के लिये किया जाएगा। इस संयंत्र का निर्माण आईएआरआई द्वारा प्रायोगिक खेतों के लिये पानी की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

इस अवसर पर अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल; आईसीएआर के उपमहानिदेशक; तथा आईसीएआर/आईएआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित थे।

(स्रोतः कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, भा.कृ.अनु.प.)