बेंगलुरू में वार्षिक मक्‍का कार्यशाला

10-12 अप्रैल, 2016, बंगलुरू

Annual Maize Workshop at Bengaluruकृषि विज्ञान विश्‍वविद्यालय (UAS), बंगलुरू तथा भाकृअनुप – भारतीय मक्‍का अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली द्वारा दिनांक 10-12 अप्रैल, 2016 को कृषि विज्ञान विश्‍वविद्यालय, जीकेवीके परिसर, बंगलुरू में संयुक्‍त रूप से 59वीं वार्षिक मक्‍का कार्यशाला का आयोजन किया गया।

उद्घाटन सत्र में डॉ. जीत सिंह संधू, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप ने कहा कि जलवायु परिवर्तन परिदृश्‍य के तहत चावल तथा गेहूं की तरह ही मक्‍का भी एक अनुकूल अथवा समुत्‍थानशील फसल है। उन्‍होंने कहा कि आगामी दस वर्षों में, भारत में मक्‍का की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मक्‍का के उत्‍पादन तथा उत्‍पादकता को दोगुना करने की  जरूरत है क्‍योंकि मक्‍का भी  भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। डॉ. सिंह ने इस महान राष्‍ट्र के किसानों से अपनी फार्म लाभप्रदता को बढ़ाने के लिए उन्‍नत उत्‍पादन प्रौद्योगिकी को अपनाने का अनुरोध किया।

डॉ. विनय महाजन, निदेशक, भाकृअनुप – आईआईएमआर ने कहा कि अपनी उच्‍च उपज क्षमता के कारण एकल क्रास वाले संकरों को अपनाने से किसानों की लाभप्रदता बढ़ेगी और इससे मक्‍का की उत्‍पादकता में वृद्धि होगी। डॉ. महाजन ने जलवायु अनुकूल नई उच्‍च उपजशील किस्‍मों के विकास पर फोकस बढ़ाने पर बल दिया।

डॉ. एच. शिवन्‍ना, कुलपति, कृषि विज्ञान विश्‍वविद्यालय, बेंगलुरू ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि किसानों की लाभप्रदता और मक्‍का की उत्‍पादकता को बढ़ाने में इस कार्यशाला द्वारा जरूरी सिफारिशे की जाएंगी। साथ ही उन्‍होंने कहा कि किसानों को अपने खेत उत्‍पादों के लिए आकर्षक मूल्‍य नहीं मिल पा रहे हैं। उन्‍होंने कर्नाटक के मांडया जिले के किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी संख्‍या में किसान गन्‍ना बो रहे हैं लेकिन उनकों आकर्षक मूल्‍य नहीं मिल पा रहे हैं।  उन्‍होंने मक्‍का जैसी पानी की कम आवश्‍यकता वाली फसल को अपनाने; उच्‍च उपजशील एकल क्रॉस संकर की खेती करने का सुझाव दिया जिससे किसानों की लाभप्रदता बढ़ेगी।  

तीन दिवसीय समूह बैठक के दौरान पिछले वर्ष की प्रगति की समीक्षा की गई और वर्ष 2016-17 के लिए तकनीकी कार्यक्रम को तैयार किया गया।

इस कार्यक्रम में देशभर के मक्‍का वैज्ञानिक और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

(स्रोत : भाकृअनुप – भारतीय मक्‍का अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली)