गंगटोक, सिक्किम में कृषि विज्ञान केन्‍द्रों की वार्षिक जोनल कार्यशाला का उद्घाटन

22 अप्रैल, 2016, गंगटोक

श्री सोमनाथ पौडियाल, माननीय एफएसएडीडी एवं एचसीसीडीडी मंत्री, सिक्किम सरकार ने आज यहां कृषि विज्ञान केन्‍द्रों  की वार्षिक जोनल कार्यशाला 2015-16 का उद्घाटन किया।

Annual Zonal Workshop of KVK Inaugurated at  Gangtok, SikkimAnnual Zonal Workshop of KVK Inaugurated at  Gangtok, Sikkim

अपने प्रारंभिक उद्बोधन में श्री पौडियाल ने सामान्‍यत: उत्‍तर पूर्व में और विशेषकर सिक्किम में कृषि उत्‍पादन को बढ़ाने में कृषि विज्ञान केन्‍द्रों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्‍होंने इस बात के लिए भी सतर्क किया कि चूंकि अब सिक्किम एक जैविक राज्‍य बन गया है, इसलिए राज्‍य में टिकाऊ खाद्य उत्‍पादन को सुनिश्चित करने में कृषि विज्ञान केन्‍द्रों द्वारा और अधिक जिम्‍मेदारी निभानी होगी।

श्री बिद्युत सी. डेका, निदेशक, अटारी, जोन-3, उमियाम ने कार्यशाला के उद्देश्‍यों के बारे में संक्षिप्‍त जानकारी दी।

 कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री, भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. जितेन्‍द्र चौहान ने कहा कि कृषि एवं सम्‍बद्ध विज्ञान के संबंध में कृषि विज्ञान केन्‍द्र देश की जीवनरेखा बन गए हैं।

श्री खोरलो भूटिया, सचिव, एफएसएडीडी एवं एचसीसीडीडी, सिक्किम सरकार ने अपने संबोधन में सिक्किम के माननीय मुख्‍यमंत्री को राज्‍य को जैविक राज्‍य के रूप में रूपांतरित करने के लिए धन्‍यवाद दिया। साथ ही उन्‍होंने निदेशक, अटारी, जोन-3, उमियाम से अनुरोध किया कि कृषि विज्ञान केन्‍द्रों द्वारा जैविक खेती पर विभिन्‍न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।

डॉ. वी.एस. ठाकुर, कुलपति, वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्‍वविद्यालय, सोलन ने पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु अनुकूल फसल उत्‍पादन पर बल दिया।

प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह, कुलपति, सीएयू, इम्‍फाल ने इस बात को उठाया कि हमारे सामने अनेक चुनौतियां मौजूद हैं लेकिन हमें वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने के भारत सरकार के लक्ष्‍य को हासिल करने में अपना सर्वश्रेष्‍ठ प्रयास करना चाहिए।

डॉ. एन.एस. राठौर, उप महानिदेशक (शिक्षा), भाकृअनुप ने कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के वैज्ञानिकों के लिए कार्यशील कौशल विकास पर बल दिया। उन्‍होंने कृषि विज्ञान केन्‍द्रों से अपनी कार्यप्रणाली में परम्‍परा, प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और व्‍यापार जैसी संकल्‍पना का अनुपालन करने का अनुरोध किया।

विभिन्‍न कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के अनेक प्रकाशनों को अतिथिगणों द्वारा जारी किया गया।

इस कार्यक्रम में उत्‍तर-पूर्व के सभी 78 कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के कार्यक्रम समन्‍वयकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन 25 अप्रैल, 2016 को होगा।

(स्रोत : कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्‍थान (अटारी), उमियाम)