मार्केटिंग गुरु के रूप में प्रगतिशील किसान कैलाश

मूल्य संवर्द्धन और प्रसंस्करण सफलता के मूल मंत्र

कैलाश चौधरी गांव कीरतपुरा, राजस्थान का एक प्रगतिशील किसान है। 10वीं तक की शिक्षा हासिल करने के बावजूद वह अपने कृषि उत्पादों का पर्याप्त मूल्य प्राप्त करने के लिए विपणन मंत्र का सहारा लेता है। मूल्य संवर्द्धन और प्रसंस्करण ने उसके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। आईसीएआर के केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी संस्थान (सिफेट), लुधियाना की मदद से अब वह न केवल अधिक कमाई कर रहा है बल्कि लगभग 70 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दे रहा है।

जब कई साल पहले उसने खेती शुरू की थी तो उसकी मुख्य चिंता यह थी कि किस प्रकार से अपनी 20 एकड़ पैतृक जमीन के साथ जीविका चलाई जाए। इसी दौरान उसको जानकारी मिली कि स्थानीय कमीशन एजेंट उन्हें गेहूं की जो कीमत दे रहे थे, जयपुर में उससे दोगुनी कीमत पर वही गेहूं बेचा जा रहा था। दुकान पर जाकर उसने पाया कि गेहूं की जो किस्म वह उगाता है उसी को दोगुने दामों पर बेचा जाता है। अंतर सिर्फ इतना है कि इस गेहूं को श्रेणीकरण करते हुए पैकेजिंग कर दी जाती है। कैलाश ने भी ऐसा ही किया और अपने गेहूं की ज्यादा कीमत प्राप्त की। पैकेजिंग के महत्व को जानने के बाद वर्ष 2004 में उसने अपने गांव में एक छोटे से कमरे के अंदर एक लाख रुपये का निवेश करके खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की। सफलता के लिए कटिबद्ध कैलाश ने अपनी यात्रा जारी रखी, इसमें सिफेट की तरफ से उसे तकनीक और तकनीक से संबंधित सारी जानकारियां उपलब्ध कराई गईं। इससे कैलाश को अपने खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनाए रखने में काफी मदद मिली। कैलाश का कहना है कि संस्थान के संग उसका जुड़ाव जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। वर्ष 2006 में उसे सिफेट की ओर से तैयार आंवला की ग्रेडिंग और पंचिंग मशीनें मिलीं। इसके अतिरिक्त उसने अपने खाद्य पदार्थों के लिए जरूरी प्रसंस्करण तकनीक से जुड़ी कई जानकारियां भी संस्थान से प्राप्त की। इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उत्पाद बनाने में काफी मदद मिली।

वर्तमान में कैलाश आंवला जूस, आंवला पाउडर, एलोवेरा जूस, स्क्वैश, आचार, मिठाई आदि का उत्पादन करने के साथ अमेरिका, इंग्लैंड, यूएई और जापान को इनका निर्यात भी कर रहे हैं। उनके उत्पाद केएस बायो फूड्स ब्रांड नेम से बाजार में उपलब्ध हैं।
वह खुद भी आंवला और एलोवेरा की जैविक खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपने फार्म पर प्रसंस्करण इकाई स्थापित कर ली है जहां प्रसंस्करण और पैकेजिंग कार्य किया जा रहा है। अब स्थिति यह है कि उनके दोनों पुत्र भी कृषि और खाद्य प्रसंस्करण को समृद्धिशाली उद्योग मानने लगे हैं। अपने प्रयासों के लिए राज्य सरकार से पुरस्कृत कैलाश ने अपने राज्य के कई अन्य किसानों को कृषि-खाद्य प्रसंस्करण और जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया है।
कैलाश की सफलता सिर्फ उसकी समृद्धि से नहीं आंकी जा सकती है। उसने अपने जिले में नई चेतना पैदा करने का कार्य किया है। उसने महिला सशक्तिकरण के लिए जैविक कृषि उत्पाद महिला सहकारी समिति, कीरतपुरा का गठन किया। इसके अलावा उन्होंने जैविक खेती और खाद्य प्रसंस्करण के लिए 1500 किसानों का एक समूह बनाया है।

कैलाश का गर्व के साथ कहना है-सिर्फ मेरे गांव में ही नहीं बल्कि तहसील कोटपुतली के ग्रामीणों ने अब बारिश के पानी से सिंचाई छोड़ दी है। अब बागों के लिए ड्रिप प्रणाली और अन्य फसलों के लिए स्रिंप्रक्लर का प्रयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही हम बारिश के पानी को भी बचा रहे हैं जिससे पानी की अधिकतम उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी।

(स्त्रोत -एनएआईपी मास मीडिया सब-प्रोजेक्ट, दीपा और सिफेट)