दलहन व तिलहन क्‍लस्‍टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन पर राष्‍ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

16-17 मई, 2016, नई दिल्‍ली

कृषि विस्‍तार प्रभाग, भाकृअनुप द्वारा दिनांक 16-17 मई, 2016 को दलहन एवं तिलहन प्रौद्योगिकी मूल्‍यांकन एवं प्रदर्शन पर दो दिवसीय राष्‍ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

National Workshop on Pulses and Oilseed Cluster Frontline Demonstration Organized National Workshop on Pulses and Oilseed Cluster Frontline Demonstration Organized National Workshop on Pulses and Oilseed Cluster Frontline Demonstration Organized

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाक़अनुप ने श्रेणीवार मिशन मोड में सकेन्द्रित दृष्टिकोण के साथ-साथ दलहन व तिलहन को बढ़ावा देने हेतु  निवेश करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने पुन: कहा कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए देश को 4-5 मिलियन टन अतिरिक्‍त दलहन उत्‍पादन करने की जरूरत है और इसे तभी पूरा किया जा सकता है जब हम उद्देश्‍यपरक तरीके से इसकी कार्रवाई योजना का एक ब्‍लूप्रिन्‍ट तैयार करें और उसे एक निश्चित समय सीमा में परिमाणित किया जाए।

डॉ. ए.के. सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्‍तार), भाकृअनुप ने प्रतिभागियों का स्‍वागत करते हुए राष्‍ट्र स्‍तर पर रबी दलहन और तिलहन के अपने अनुभवों को साझा किया और साथ ही दलहन प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और सीड हब कार्यक्रम के बारे में संक्षिप्‍त जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि नई किस्‍मों और परिस्थिति विशिष्‍ट प्रौद्योगिकियों पर ध्‍यान देने की जरूरत है तथा साथ ही अधिकतम उपज लाभ लेने के लिए प्रदर्शनों का प्रबंधन करने, गुणवत्‍ता बीज के रूप में किसानों से किसानों के बीच उत्‍पादों का प्रसार करने और किसान के स्‍तर पर दलहन के मूल्‍य वर्धन को बढ़ावा देने की जरूरत को रेखांकित किया।

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डॉ. जे.एस. संधू, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप ने ऐसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढ़ंग से लागू करने की जरूरत बताई जिनका लक्ष्‍य उद्देश्‍यपरक होता है। प्रदर्शनों में नई तथा उन्‍नत किस्‍मों के साथ-साथ दलहन व तिलहन की प्रौद्योगिकियों का भी उपयोग किया जाए जिनसे उपज को प्रत्‍यक्ष लाभ मिल सके।

डॉ. एस.के. मल्‍होत्रा, कृषि आयुक्‍त, भारत सरकार ने खाद्य, पोषण तथा आजीविका सुरक्षा के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला और दलहन में बीज प्रतिस्‍थापन दर में बढ़ोतरी करने, किसानों द्वारा प्रमाणित एवं गुणवत्‍ता बीजों का कहीं अधिक इस्‍तेमाल करने और ऐसी फसलों विशेषकर सर्दियों के मौसम के दौरान संरक्षित सिंचाई के प्रावधानों पर बल दिया।

श्री संजय लोहिया, संयुक्‍त सचिव (फसलें), कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्‍याण विभाग, कृषि मंत्रालय ने दलहन और तिलहन का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए मंत्रालय के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला जिसमें कि प्रजनक बीज उत्‍पादन, देश में सीड हब स्‍थापित करने, सीड मिनीकिट का वितरण करने, ऐसी फसलों में सब्सिडी में वृद्धि करने और राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों द्वारा जैव उर्वरकों का उत्‍पादन करने पर संकेन्द्रित दृष्टिकोण अपनाया जाना शामिल है।

आपसी विचार-विमर्श के उपरान्‍त कार्यशाला में यह प्रस्‍तावित किया गया कि देश में 100 – 150 बीज हब होने चाहिए और प्रत्‍येक बीज हब को प्रति वर्ष लगभग 1000 क्विंटल गुणवत्‍ता बीजों को उत्‍पन्‍न करने की जिम्‍मेदारी सौंपी जानी चाहिए ताकि देश लगभग 1.5 लाख क्विंटल गुणवत्‍ता बीज उत्‍पन्‍न करने में समर्थ बन सके जो कि देश की कुल बीज मांग का लगभग 5 प्रतिशत होगा।

दलहन और तिलहन के क्‍लस्‍टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के लिए वर्ष 2016-17 के लिए योजना को अंतिम रूप प्रदान किया गया। इस कार्यशाला में भाक़अनुप; कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्‍याण विभाग; अटारी तथा कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

(स्रोत : भाकृअनुप - कृषि विस्‍तार प्रभाग)