कृषि यांत्रिकीकरण पर शिक्षाविदों और उद्योग के बीच आपसी बैठक

3 मई, 2016, पुणे

Academia-Industry Interaction Meet on Agricultural Mechanizationभाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान  (CIAE), भोपाल द्वारा महाराष्‍ट्र राज्‍य में नवोन्‍मेषी प्रौद्योगिकियों और यांत्रिकीकरण की जरूरतों पर आपसी विचार विमर्श करने के प्रयोजन से विभिन्‍न भाकृअनुप संस्‍थानों, कृषि विश्‍वविद्यालयों और महाराष्‍ट्र के अग्रणी कृषि मशीनरी उत्‍पादकों के लिए एक साझा प्‍लेटफार्म उपलब्‍ध कराने हेतु आज यहां शिक्षाविदों और उद्योग के बीच आपसी विचार-विमर्श बैठक का आयोजन किया गया।

इस बैठक में 60 से भी अधिक कृषि मशीनरी उत्‍पादकों और उनके प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इसके अलावा, निदेशक, भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान, भोपाल ने प्रतिनिधियों का नेतृत्‍व किया। प्रतिनिधियों में पुष्‍पविज्ञान, प्‍याज एवं लहसुन, अंगूर अनुसंधान पर भाकृअनुप संस्‍थानों के निदेशक, तथा एमपीकेवी, राहुरी, कृषि विभाग, महाराष्‍ट्र सरकार; महाराष्‍ट्र राज्‍य कृषि उद्योग विकास निगम, मुम्‍बई से कुल 33 शिक्षा प्रतिनिधि शामिल थे।

डॉ. के.पी. विश्‍वनाथ, कुलपति, एमपीकेवी, राहुरी इस बैठक के मुख्‍य अतिथि थे। अपने सम्‍बोधन में, डॉ. विश्‍वनाथ ने उच्‍चतर उत्‍पादन और आमदनी हासिल करने में किसान समुदाय द्वारा महसूस की जा रही मजदूरों की कमी की समस्‍या का किफायती और समयबद्ध समाधान प्रस्‍तुत करने की चुनौतियों पर बल दिया।

डॉ. वी.एम. मयांडे, पूर्व कुलपति, पीडीकेवी, अकोला और डॉ. के.डी. कोकाटे, निदेशक, प्रसार शिक्षा, एमपीकेवी, राहुरी ने बताया कि ऐसी कई सौ प्रौद्योगिकियां राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली में पहले से ही उपलब्‍ध हैं जिनका उत्‍पादकों के माध्‍यम से व्‍यावसायीकरण करने की जरूरत है ताकि उन्‍हें किसानों को तेजी से उपलब्‍ध कराया जा सके।

डॉ. के.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान, भोपाल  ने इस बैठक को सफल बनाने हेतु महाराष्‍ट्र राज्‍य से बड़ी संख्‍या में उपस्थित उपकरण उत्‍पादकों की उपस्थिति पर संतोष जताया । उन्होंने जानकारी दी कि भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान, भोपाल प्रशिक्षण देने, उत्‍पादन विकास में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने तथा साथ ही फार्म मशीनरी का परीक्षण करने में हरसंभव सहयोग देने में सक्षम एवं तत्‍पर है। उन्होंने पुन: कहा कि कृषि क्षेत्र में महिला श्रमिकों की बढ़ रही संख्‍या को देखते हुए उत्‍पादकों को सरल, महिला अनुकूल तथा कम मेहनत वाले टूल्‍स और मशीनरी विकसित करने की दिशा में पुन: विचार करने की जरूरत है।

श्री डी.के. सूर्यगन, उप महाप्रबंधक, एमएआईडीसी, मुम्‍बई ने महाराष्‍ट्र सरकार के सब्सिडी कार्यक्रम के तहत कृषि मशीनरी की खरीद के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी।

इस बैठक का आयोजन महात्‍मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी; एआईएएमएमए, पुणे चैप्‍टर; तथा महाराष्‍ट्र राज्‍य कृषि उद्योग विकास निगम, मुम्‍बई के साथ मिलकर किया गया था।

शिक्षा तथा उद्योग के प्रतिनिधियों के बीच गहन विचार विमर्श के उपरान्‍त उभर कर आये मुद्दों पर कुछ प्रमुख सिफारिशें की गईं जो कि इस प्रकार थीं :

  • उत्‍पादकों के साथ सहयोग करते हुए भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान, भोपाल द्वारा उच्‍च क्षमता वाली पॉवर चालित मशीनरी का विकास किया जाए
  • परीक्षण फीस, परीक्षण के लिए लगने वाले समय जैसे कृषि मशीनरी के परीक्षण से संबंधित अनेक मुद्दों का समाधान किया जाए
  • उच्‍च क्षमता वाली मशीनों की आसानी से उपलब्‍धता हेतु कस्‍टम हायरिंग हब का सृजन
  • कृषि मशीनरी के फैब्रीकेशन तथा परिचालन, रखरखाव और मरम्‍मत के लिए कौशल विकास केन्‍द्रों की स्‍थापना