भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्‍थान, झांसी में स्‍थापना दिवस समारोह

8 मई, 2016, झांसी

भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्‍थान, झांसी में 28वां स्‍थापना दिवस समारोह मनाया।

Foundation Day of ICAR-Central Agroforestry Research Institute, Jhansi CelebratedFoundation Day of ICAR-Central Agroforestry Research Institute, Jhansi Celebrated

डॉ. वी.एन. शारदा, सदस्‍य, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्‍ली ने अपने स्‍थापना दिवस व्‍याख्‍यान में कृषि वानिकी में उभर रहे मुद्दों पर प्रकाश डाला और कृषि वानिकी उत्‍पादन तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं संरक्षण पर अनुसंधान करने का सुझाव दिया। डॉ. शारदा ने सुझाव दिया कि देश के सभी प्रमुख भूमि उपयोग को शामिल करके दीर्घावधि परीक्षण किए जाएं और विभिन्‍न विषयों के वैज्ञानिकों को शामिल करते हुए सभी संबंधित पैरामीटरों पर अध्‍ययन किये जायें। उन्होंने वैज्ञानिकों से ऐसा अनुसंधान करने के लिए कहा जो कि प्रो-एक्टिव हो, पहले से अपेक्षित हो, समस्‍या को सुलझाने वाला हो, परिणाम उन्‍मुख हो तथा जिसमें किसानों की भागीदारी हो और वह एक नेटवर्क मोड में हो। उन्होंने किसानों के साथ कार्य करते समय तथा वास्‍तविक खेत परिस्थितियों में समस्‍याओं का समाधान करते समय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनकी इष्‍टतम उपयोगिता के साथ साथ उत्‍पादन का विविधीकरण करने पर जोर दिया। डॉ. शारदा ने कहा कि वनों के तहत भूमि के एक तिहाई क्षेत्र को लाने के लिए कृषि वानिकी ही अकेला समाधान है। उन्होंने  कृषि वानिकी के क्षेत्र में स्‍लोपिंग कृषि भूमि तकनीकी (SALT) की संभावनाएं तलाशने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मानव तथा पशु जनसंख्‍या के लिए वर्ष 2050 की खाद्य, फल, चारा, ईंधन की लकड़ी, इमारती लकड़ी और फर्नीचर की मांग को कृषि वानिकी द्वारा ही पूरा किया जाएगा।

डॉ. पी.के. घोष, निदेशक, भाकृअनुप – भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्‍थान, झांसी ने भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्‍थान, झांसी द्वारा किए गए योगदान की सराहना की। इनहोंने कहा कि राष्‍ट्रीय कृषि वानिकी नीति – 2014 से भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्‍थान, झांसी के समक्ष नई चुनौतियां आई हैं।

डॉ. ओ.पी. चतुर्वेदी, निदेशक, भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्‍थान, झांसी ने वर्ष 2015 के दौरान संस्‍थान की प्रमुख उपलब्धियों और नवीन पहलों के बारे में संक्षिप्‍त जानकारी दी। उन्होंने कृषि वानिकी में टिकाऊ विकास, पारिस्थितिकी सेवाओं और ग्रामीण आजीविका के बारे में जानकारी दी और साथ ही संस्‍थान द्वारा मेरा गांव – मेरा गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश में अपनाए गए गांवों, विश्‍व मृदा दिवस तथा जय किसान – जय विज्ञान कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में जानकारी दी।

कृषि वानिकी प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए दो प्रगतिशील किसानों को सम्‍मानित किया गया।

इस अवसर पर तीन प्रकाशन भी जारी किये गये।

इस कार्यक्रम में राज्‍य के संबंधित विभागों, कृषि विज्ञान केन्‍द्रों, गैर सरकारी संगठनों, इफको, आईजीएफआरआई, झांसी तथा आईआईएसडब्‍ल्‍यूसी, दतिया के वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया।

(स्रोत : भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्‍थान, झांसी)