भारतीय अनाज भण्‍डारण कार्यकारी समूह की बैठक

22 अप्रैल, 2016, नई दिल्‍ली

आज यहां भारतीय अनाज भण्‍डारण कार्यकारी समूह की तीसरी बैठक (22-23 अप्रैल, 2016) का उद्घाटन  किया गया।

Meeting of Indian Grain Storage Working GroupMeeting of Indian Grain Storage Working Group

श्री राधा मोहन सिंह, माननीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने अपने उद्घाटन संबोधन में वैज्ञानिकों का फार्म स्‍तरीय भण्‍डारण के लिए कम लागत वाली भण्‍डारण प्रणालियों, कृषि प्रसंस्‍करण उद्योगों के लिए लागत प्रभावी भण्‍डारण प्रणालियों और बैग भण्‍डारण संरचनाओं के लिए आधुनिक वेयरहाउसों का विकास करने पर ध्‍यान देने का आह्वान किया। माननीय मंत्री महोदय ने सुरक्षित भण्‍डारण, अनाज की सफाई, उसे सुखाने तथा थैलों में भरने के उपकरणों हेतु अनाज गुणवत्‍ता विश्‍लेषण प्रोटोकॉल के साथ साथ अनाज के लिए धूमीकरण विधियों पर जोर दिया। माननीय मंत्री महोदय ने कहा कि राष्‍ट्रीय कृषि बाजार से कृषि जिंसों का  राष्‍ट्रीय स्‍तर पर इलैक्‍ट्रोनिक तरीके से व्‍यापार करने में मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम में, भारत की 585 कृषि मंडियों को आपस में जोड़ा जाएगा और किसान भाई अपनी फसलों के लिए अधिकतम मूल्‍य हासिल कर सकेंगे तथा दलालों का दखल भी काफी हद तक कम हो सकेगा। माननीय मंत्री महोदय ने पुन: कहा कि भारत सरकार एक समिति गठित करने पर विचार कर रही है जिसके द्वारा कटाई उपरांत फसल नुकसान में कमी लाने के लिए वेयरहाउस स्‍थान में प्रभावशीलता को बढ़ाने के  उपाय सुझाये जाएंगे।

माननीय मंत्री महोदय ने ‘जर्नल ऑफ ग्रेन स्‍टोरेज रिसर्च’ का प्रथम अंक भी जारी किया।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने भारत में अनाज भण्‍डारण की वर्तमान स्थिति पर विस्‍तृत प्रकाश डाला। उन्होंने अनाज भण्‍डारण प्रणाली को नुकसान रहित बनाने, सक्रिय अनुसंधानकर्मियों, भण्‍डारण एजेन्सियों, ट्रांसपोर्टरों, वेयरहाउस और साइलो उत्‍पादकों व अन्‍य हितधारकों  से वैज्ञानिक, तकनीकी तथा व्‍यावसायिक आदान हासिल करने की जरूरत पर बल दिया।

श्री राजू श्राफ, चेयरमैन, सीसीएफआई ने भारत में कटाई उपरांत होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की भी मदद की गई है और अनाज के सुरक्षित भण्‍डारण के लिए पिछले 15 वर्षों में लगभग 3500 गोदाम स्‍वीकृत किए गए हैं। भारत में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि विज्ञान केन्‍द्रों द्वारा अनाज के सुरक्षित भण्‍डारण के लिए कौशल विकास पर प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

डॉ. दिग्विर जयास, प्रोफेसर और कुलपति (अनुसंधान एवं अंतर्राष्‍ट्रीय), यूनिवर्सिटी ऑफ मैनीटोबा, कनाडा ने कहा कि नुकसान को न्‍यूनतम करने के लिए हमें शरीरक्रियाविज्ञान तथा जैविक पर्यावरण के बीच पारस्‍परिकता पर ध्‍यान देना होगा। उन्होंने बताया कि किसानों को प्रौद्योगिकीय मुद्दों पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। वैज्ञानिक प्रशिक्षणों को संशोधित किया जाए ताकि किसान इन प्रशिक्षणों को आसानी से समझ सकें और इन्‍हें अपना सकें।

डॉ. के. अलगुसुन्‍दरम, उप महानिदेशक (अभियांत्रिकी), भाकृअनुप ने धन्‍यवाद ज्ञापन प्रस्‍तुत किया।

(स्रोत : कृषि अभियांत्रिकी प्रभाग, भाकृअनुप )