भाकृअनुप – भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्‍थान (IGFRI), झांसी

1 नवम्‍बर, 2015, झांसी

भाकृअनुप – भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्‍थान (IGFRI), झांसी द्वारा दिनांक 1 नवम्‍बर, 2015 को अपना 54वां स्‍थापना दिवस मनाया गया। पद्म भूषण डॉ. आर.एस. परोदा, पूर्व सचिव, डेयर तथा महानिदेशक, भाकृअनुप ने मुख्‍य अतिथि के रूप में ‘’पशुधन क्षेत्र की त्‍वरित प्रगति के लिए चारा फसलों पर रणनीति’ विषय पर अपना स्‍थापना दिवस व्‍याख्‍यान प्रस्‍तुत किया। डॉ. परोदा ने चरागाह एवं चारा पर अनुसंधान के महत्‍व और नए क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। साथ ही इन्‍होंने भारतीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्‍त AR4D हेतु रणनीति की रूपरेखा बताई और भारत को ‘’कृषक प्रधान’’ देश बनाने का आह्वान किया। इन्‍होंने प्रचलित सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में अनुसंधान पर जोर दिया ताकि विकसित प्रौद्योगिकियों को अधिकता में अपनाया जा सके। डॉ. परोदा ने संस्‍थान की ‘’पशुधन आधारित कृषि प्रणाली इकाई’’ का उद्घाटन किया। इन्‍होंने एक बेहतर वैज्ञानिक परिवेश का सृजन  करने के लिए संस्‍थान स्‍टॉफ के प्रयासों की सराहना की।

Dr R. S. Paroda inaugurating Livestock Based Farming System Unit of IGFRIDr R. S. Paroda delivering  Foundation Day Lecture

डॉ. ए.के. सिंह, कुलपति, आरवीएसकेवीवी, ग्‍वालियर (मध्‍य प्रदेश) तथा कार्यक्रम के विशिष्‍ट अतिथि ने जलवायु परिवर्तन, बंजर भूमि विकास और दोहरे प्रयोजन वाली चारा किस्‍मों पर अनुसंधान को बढ़ाने का अनुरोध किया। इन्‍होंने बताया कि कृषि प्रणाली के पशुधन घटक द्वारा विशेषकर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसान समुदाय की संवदेनशीलता को कम किया जा सकता है।

डॉ. पी.के. घोष, निदेशक, भाकृअनुप – भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्‍थान, झांसी ने अतिथियों का स्‍वागत किया और राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय दोनों स्‍तरों पर संस्‍थान की अनुसंधान एवं आउटरिच गतिविधियों तथा नई पहलों के बारे में प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम में संस्‍थान, राज्‍य सरकार तथा बैंक  के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

अतिथिगणों ने संस्‍थान के फार्म का दौरा किया जहां चल रहे परीक्षणों को देखा और संस्‍थान की गतिविधियों की सराहना की। मुख्‍य अतिथि ने संस्‍थान के स्‍टाफ में उल्‍लेखनीय योगदान करने वालों को सम्‍मानित किया गया। इस अवसर पर संस्‍थान के दो नए प्रकाशन भी जारी किए गए।

(स्रोत : भाकृअनुप – भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्‍थान (IGFRI), झांसी)