भाकृअनुप – भारतीय मक्‍का अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली का प्रथम स्‍थापना दिवस

14 नवम्‍बर, 2015, नई दिल्‍ली

तत्‍कालीन मक्‍का अनुसंधान निदेशालय से आईआईएमआर के रूप में प्रोन्‍नत होने के उपरांत भाकृअनुप – भारतीय मक्‍का अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली ने  आज अपना प्रथम स्‍थापना दिवस मनाया ।

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डॉ. बी.एम. प्रसन्‍ना, डायरेक्‍टर ऑफ दि ग्‍लोबल मेज प्रोग्राम, सिम्‍मट एवं सीजीआईएआर अनुसंधान कार्यक्रम, मेज (MAIZE) ने ‘वर्ष 2025 तक भारत के मक्‍का उत्‍पादन को दोगुना करना’ विषय पर प्रथम स्‍थापना दिवस व्‍याख्‍यान प्रस्‍तुत किया। डॉ. प्रसन्‍ना ने इनपुट  एवं आउटपुट बाजारों के बीच एक संतुलन बनाकर समुचित नीति हस्‍तक्षेपों के साथ दोगुने अगुणित तथा आणविक साधनों का उपयोग करके उत्‍पादकता में सुधार दर को बढ़ाने की नितांत जरूरत पर प्रकाश डाला।

डॉ. जीत सिंह सन्‍धू, उपमहानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप एवं कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि ने विकासशील जलवायु अनुकूल कृषि में मक्‍का की महत्‍वपूर्ण भूमिका बताई और मक्‍का वैज्ञानिकों से विशेषकर खरीफ मौसम की बारानी कृषि प्रणाली में  किसानों के खेतों में वास्‍तविक मक्‍का उपज और हासिल की जाने योग्‍य उपज के बीच अन्‍तराल को पाटने के लिए सार्थक प्रयास करने का आह्वान किया।

डॉ. जे.एस. चौहान, सहायक महानिदेशक (बीज) एवं कार्यक्रम के विशिष्‍ट अतिथि ने सार्वजनिक क्षेत्र में संकर अनुकूलन को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक – निजी सहभागिता के नए तरीके तलाशने का सुझाव दिया।

डॉ. आई.एस. सोलंकी, सहायक महानिदेशक (एफएफसी), भाकृअनुप तथा कार्यक्रम के विशिष्‍ट अतिथि ने संकर विकास और बीज उत्‍पादन के समेकन की वकालत की।

डॉ. ओ.पी. यादव, निदेशक, भाकृअनुप – भारतीय मक्‍का अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली ने ‘भारत में मक्‍का अनुसंधान की छ: दशकों की यात्रा’ विषय पर विस्‍तृत प्रस्‍तुतिकरण दिया जिसमें देश में मक्‍का अनुसंधान में प्रयुक्‍त विभिन्‍न रणनीति हस्‍तक्षेपों को शामिल किया गया।

इस अवसर पर एक डाक्‍यूमेन्‍टरी ‘’अमेजिंग मेज – दि स्‍टोरी ऑफ आईआईएमआर’ तथा ‘आईआईएमआर न्‍यूजलैटर’ को जारी किया गया।

इस अवसर पर वैज्ञानिकों, संस्‍थान के कर्मचारियों, प्रगतिशील मक्‍का किसानों तथा उद्यमियों को उनके उल्‍लेखनीय योगदान के लिए सम्‍मानित किया गया। इस कार्यक्रम में भाकृअनुप संस्‍थानों के वरिष्‍ठ संकाय सदस्‍यों, भाकृअनुप के अधिकारियों तथा दिल्‍ली स्थित भाकृअनुप संस्‍थानों के निदेशकों तथा दक्षिण एशिया के लिए बोरलॉग संस्‍थान; पौधा किस्‍म एवं कृ‍षक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण; तथा राष्‍ट्रीय बीज निगम के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

(स्रोत : भाकृअनुप – भारतीय मक्‍का अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली)