हरित क्रान्तिकी स्‍वर्ण जयंती पर राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन

27 नवम्‍बर, 2015, नई दिल्‍ली

श्री राधा मोहन सिंह, माननीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने आज यहां हरित क्रान्तिकी स्‍वर्ण जयंती के उपलक्ष्‍य में आयोजित राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। मुख्‍य अतिथि के रूप में बोलते हुए माननीय मंत्री महोदय ने हरित क्रान्तिसे पहले की अवधि में खाद्यान्‍नों की भारी कमी को याद करते हुए देश को एक खाद्य सरप्‍लस राष्‍ट्र के रूप में रूपांतरित करने के लिए कृषि अनुसंधान बिरादरी की प्रशंसा की। उन्‍होंने हरित क्रान्तिके दौरान कृषि उत्‍पादकता और कृषि उत्‍पादन में हुई अभूतपूर्व वृद्धि में तथा साथ ही उसके बाद भी इस प्रगतिको बनाए रखने में विज्ञान व प्रौद्योगिकी की महत्‍वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। माननीय मंत्री महोदय ने खाद्य संकट के समय भारत की मदद करने के लिए नोबल पुरस्‍कार विजेता डॉ. नॉर्मन ई. बोरलॉग को अपनी श्रद्धांजलि दी तथा हरित क्रान्तिके सपने को साकार करने में केन्‍द्रीय भूमिका निभाने वाले एवं पद्म विभूषण से सम्‍मानित डॉ. एम.एस. स्‍वामीनाथन का सम्‍मान किया। माननीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने देश में हरित क्रान्तिलाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले किसानों और संस्‍थानों सहित दिग्‍गजों और पूर्व वैज्ञानिकों के साथ-साथ डॉ. एन.जी.पी. राव तथा डॉ. एम.वी. राव को भी सम्‍मानित किया।

National Conference on Golden Jubilee of Green Revolution 2015
National Conference on Golden Jubilee of Green Revolution 2015National Conference on Golden Jubilee of Green Revolution 2015National Conference on Golden Jubilee of Green Revolution 2015

माननीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने कृषि की हालत को सुधारने और किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए हालिया प्रारंभ की गईं विभिन्‍न सरकारी योजनाओं के बारे में विस्‍तार से बताया। उन्‍होंने कहा  कि सरकार के सहयोग और हमारे वैज्ञानिकों व किसानों की कड़ी मेहनत से देश का पूर्वी क्षेत्र दूसरी हरित क्रान्तिकी अगुवाई कर रहा है। माननीय मंत्री महोदय ने सूखा तथा अन्‍य प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को कम करने के लिए विभिन्‍न उपाय करने पर बल दिया और कहा कि लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दलहन व तिलहन के खेती क्षेत्रफल और उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए विशेष उपाय किये जा रहे हैं। उन्‍होंने वैज्ञानिकों से हरित क्रान्तिकी सफलता से प्रेरणा लेकर देश को आगे ले जाने का अनुरोध किया।

मंत्री जी ने  हरित क्रान्तिकी स्‍वर्ण जयंती पर एक विशेष डाक टिकट जारी की और विशेष प्रकाशन का विमोचन किया।

National Conference on Golden Jubilee of Green Revolution 2015National Conference on Golden Jubilee of Green Revolution 2015National Conference on Golden Jubilee of Green Revolution 2015

प्रो. एम.एस. स्‍वामीनाथन, अध्‍यक्ष, एमएसएसआरएफ, चेन्‍नई ने हरित क्रान्तिकी यात्रा को प्रस्‍तुत करते हुए अपना मुख्‍य संबोधन दिया और भारतीय कृषि तथा खाद्य क्षेत्र द्वारा महसूस की जा रहीं वर्तमान चुनौतियों के बारे में बताया। डॉ. स्‍वामीनाथन ने प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक नीतिके बीच उत्‍कृष्‍ट तालमेल पर प्रकाश डाला जिससे हरित क्रान्तिको अभूतपूर्व सफलता मिली। उन्‍होंने व्‍यापक पैमाने पर नई किस्‍मों के राष्‍ट्रीय प्रदर्शन और अंगीकरण में सहयोग करने के लिए देश के किसानों की सराहना की जिन्‍होंने तुरंत देश में गेहूं उत्‍पादन को बढ़ाने की प्रतिज्ञा की। डॉ. स्‍वामीनाथन ने अनेक साथी वैज्ञानिकों के योगदान को याद किया और डॉ. बोरलॉग को उनकी मदद, सहयोग और मार्गदर्शन के लिए श्रद्धांजलि दी। उन्‍होंने अनेक वैज्ञानिक पहलों के बारे में विस्‍तार से बताया जिनसे पोषणिक सुरक्षा और भूख से मुक्तिदिलाने में मदद की जा सकती है।

इससे पहले, डॉ. एस. अय्यप्‍पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप तथा अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस)  ने आयातक राष्‍ट्र से खाद्य अधिकार तक राष्‍ट्र के  रूपांतरण को दर्शाते हुए हरित क्रान्तिकी यात्रा पर एक प्रस्‍तुतिकरण दिया। उन्‍होंने कहा कि टिकाऊ खाद्य सुरक्षा और सदाबहार क्रान्तितथा पोषणिक सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कृषि में नवोन्‍मेष, निवेश और प्रोत्‍साहन को अधिक महत्‍व दिए जाने की जरूरत है। साथ ही उन्‍होंने अनेक अवसरों के बारे में भी विस्‍तार से बताया जिनका लाभ वर्तमान चुनौतियों का समाधान करने ओर कृषि को मांग चालित तथा लाभप्रद बनाने में लिया जा सकता है।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान, पूसा, नई दिल्‍ली ने स्‍वागत संबोधन प्रस्‍तुत करते हुए हरित क्रान्तिकी अपार सफलता में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान, पूसा द्वारा निभाई गई भूमिका पर प्रकाश डाला।

राष्‍ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस)  के पूर्व अध्‍यक्षों, राष्‍ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी फैलो, पूर्व तथा प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, भाकृअनुप तथा कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों, अंतर्राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान संगठनों के प्रतिनिधियों, कृषि विश्‍वविद्यालयों के कुलपतियों व प्रतिनिधियों तथा नीतिनिर्माताओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

इस राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन राष्‍ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी; भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान द्वारा संयुक्‍त रूप से किया गया।

डॉ. एम.पी. यादव, सचिव, ने धन्‍यवाद ज्ञापन प्रस्‍तुत किया।

(स्रोत – भाकृअनुप – डीकेएमए, नई दिल्‍ली)