ओलावृष्टि प्रबंधन पर टास्‍क फोर्स बैठक का आयोजन

21 नवम्‍बर, 2015, पुणे

2nd ICAR Hailstorm Task Force Meeting Organized ओलावृष्टि प्रबंधन पर दूसरी टास्‍क फोर्स समितिकी बैठक दिनांक 21 नवम्‍बर, 2015 को भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र, पुणे में आयोजित की गई।

डॉ. ए.के. सिक्‍का, उपमहानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) तथा टास्‍क फोर्स के अध्‍यक्ष ने टास्‍क फोर्स की पृष्‍ठभूमि के बारे में सदन को संक्षिप्‍त जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से ओलावृष्टि की आवृत्तिबढ़ी है और उन्‍होंने ओलावृष्टि का प्रबंधन करने हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा प्रणाली (NARES) के प्रयासों की संक्षिप्‍त जानकारी दी। डॉ. सिक्‍का ने कहा कि ओलावृष्टि का पूर्वानुमान लगाना एक चुनौतीभरा कार्य है और इस बारे में दो घंटों का पूर्वानुमान  समय महत्‍वपूर्ण होगा। उन्‍होंने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से इस बारे में विचार करने का अनुरोध किया।

डॉ. एन. कृष्‍णकुमार, उपमहानिदेशक (बागवानी विज्ञान) एवं टास्‍क फोर्स के चेयरमैन ने सुझाव दिया कि वैज्ञानिकों द्वारा एक नियमित प्रक्रिया और इसकी सघनता और आवृत्तिके क्षेत्र के तौर पर ओलावृष्टि की समस्‍या का विश्‍लेषण करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि आंकड़ों का संकलन प्रणालीबद्ध होना चाहिए और संस्‍थानों, विश्‍वविद्यालयों, अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना प्रणाली द्वारा उदारता के साथ आंकड़ों का संकलन किया जाना चाहिए।

डॉ. बी. वेंकटश्‍वरलू, कुलपति,  वसन्‍तराव नाइक मराठवाडा कृषि विद्यापीठ, परभणी ने अपने संबोधन में कहा कि ओलावृष्टि कोई शैक्षणिक मुद्दा नहीं है। रबी मौसम के दौरान, गेहूं, चना तथा स्‍वीट लाइम में अधिक नुकसान देखने को मिलता है। उन्‍होंने अवस्‍था वार फसल आंकड़े संकलित करने की आवश्‍यकता बताई।

प्रो. एम.सी. वार्ष्‍णेय, कुलपति, कामधेनु विश्‍वविद्यालय, गांधीनगर ने बताया कि ओलावृष्टि के कारण पशुधन और अन्‍य क्षेत्र भी समान रूप से प्रभावित होते हैं और प्रस्‍तावित परियोजनाओं में इन क्षेत्रों को भी शामिल करना जरूरी है।

डॉ. पी.एस. मिन्‍हास, निदेशक, भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय अजैविक दबाव प्रबंधन संस्‍‍थान, बारामती ने कहा कि महाराष्‍ट्र में सूखा तथा ओलावृष्टि दो प्रमुख समस्‍याएं हैं । पूर्वानुमान के अलावा, कटाई उपरांत नुकसान में कमी भी एक प्रमुख टास्‍क है।

डॉ. चौ. श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप – केन्‍द्रीय शुष्‍कभूमि कृषि अनुसंधान संस्‍थान (CRIDA), हैदराबाद तथा टास्‍क फोर्स के संयोजक ने पहली टास्‍क फोर्स बैठक का कार्यवृत्‍त प्रस्‍तुत किया और बैठक की कार्यसूची के बारे में संक्षिप्‍त जानकारी दी।

इससे पहले, डॉ. एस.डी. सावंत, निदेशक, भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र, पुणे ने प्रतिनिधियों का स्‍वागत किया।

इस बैठक में बागवानी एवं फसल विज्ञान प्रभागों के अनेक वैज्ञानिकों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्‍थानों के निदेशकों, परियोजना समन्‍वयकों, भारतीय मौसमविज्ञान विभाग, राष्‍ट्रीय बागवानी बोर्ड, राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों के वरिष्‍ठ अधिकारियों, किसान प्रतिनिधियों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

(स्रोत : भाकृअनुप – केन्‍द्रीय शुष्‍कभूमि कृषि अनुसंधान संस्‍थान (CRIDA), हैदराबाद एवं भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र, पुणे)