भाकृअनुप – औषधीय एवं सगंधीय पादप अनुसंधान निदेशालय, आणंद में ‘मेरा गांव – मेरा गौरव’की शुरूआत

24 नवम्‍बर, 2015, आणंद, गुजरात

भाकृअनुप – औषधीय एवं सगंधीय पादप अनुसंधान निदेशालय(DMAPR), आणंद ने आज यहां अपना 24वां स्‍थापना दिवस मनाया।

समारोह के मुख्‍य अतिथि एवं चारोतर विज्ञान व प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय (CHARUSAT), चांगा, आणंद के कुलपति डॉ. बी.जी. पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि प्रमुख औषधीय एवं सगंधीय पौधों के लिए उत्‍पादन, संरक्षण तथा प्रसंस्‍करण प्रौद्योगिकियों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवोन्‍मेषी युक्तियों को आजमाने की जरूरत है।

'Mera Gaon Mera Gaurav' Initiated at ICAR-DMAPR 'Mera Gaon Mera Gaurav' Initiated at ICAR-DMAPR

सुश्री अंजलि पाण्‍डेय, संस्‍थापक, ग्‍लोबल इंडियन बिजनेस काउंसिल (GIBC), अहमदाबाद तथा समारोह की विशिष्‍ट अतिथि ने औषधीय एवं सगंधीय पादप उत्‍पादकों, प्रसंस्‍करणकर्ताओं और अंतिम प्रयोक्‍ताओं के बीच एक सम्‍पर्क विकसित करने पर बल देने का अनुरोध किया।

डॉ. जितेन्‍द्र कुमार, निदेशक, भाकृअनुप – औषधीय एवं सगंधीय पादप अनुसंधान निदेशालय(DMAPR), आणंद ने अपने अध्‍यक्षीय संबोधन में अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार के लिए औषधीय पौधों की गुणवत्‍ता नियंत्रण के लिए समुचित दिशानिर्देशों की आवश्‍यकता पर बल दिया।

‘मेरा गांव – मेरा गौरव’ के तहत गतिविधियों की शुरूआत करते हुए हितधारकों की एक बैठक आयोजित की गई जिसमें विकास एजेन्सियों के साथ सहयोग करते हुए किसानों के लिए भाकृअनुप – औषधीय एवं सगंधीय पादप अनुसंधान निदेशालय द्वारा विकसित उत्‍पादन, संरक्षण और प्रसंस्‍करण प्रौद्योगिकियों के माध्‍यम से औषधीय व सगंधीय पादप मूल्‍य श्रृंखला विकसित करने हेतु रणनीतियों की पहचान संबंधी विषय को शामिल किया गया।

औषधीय एवं सगंधीय पौधों की कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रसार के लिए ग्‍लोबल इंडिया बिजनेस काउन्सिल, अहमदाबाद के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए गए।

गुजरात में स्थित कृषि विश्‍वविद्यालयों तथा भाकृअनुप संस्‍थानों के निदेशकों, अध्‍यक्षों और प्राध्‍यापकों; भाकृअनुप मुख्‍यालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों; तथा भाकृअनुप – औषधीय एवं सगंधीय पादप अनुसंधान निदेशालय, आणंदके वैज्ञानिकों और स्‍टॉफ ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

इस कार्यक्रम में ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ योजना के तहत अंगीकृत किए गए विभिन्‍न गांवों के किसानों के साथ-साथ औषधीय पौधों में उत्‍पादकों से लेकर अंतिम उपभोक्‍ता तक विभिन्‍न वर्गों के 50 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया।

(स्रोत : भाकृअनुप – औषधीय एवं सगंधीय पादप अनुसंधान निदेशालय (DMAPR), आणंद)