नर्मदानिधि, चूजे की एक नई उन्नत नस्ल

30 अक्तूबर, 2015, जबलपुर

Narmadanidhi, a New Improved Variety of Chicken Released चूजे की एक नई तथा उन्नत स्थान विशिष्‍ट  नस्ल ‘नर्मदानिधि’ को डॉ.  के.एम.एल. पाठक,  उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान), भारतीय कृषि  अनुसंधान परिषद   द्वारा पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन कॉलेज,  नानाजी देशमुख पशु  चिकित्सा विज्ञान विश्‍वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में अहाता पालन के लिए जारी किया गया।

यह एक दोहरे प्रयोजन वाली नस्ल है जिसका विकास भारतीय कृषि  अनुसंधान परिषद  की वित्तीय सहायता से पोल्ट्री प्रजनन पर चलाई जा रही अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के जबलपुर केन्द्र द्वारा जबलपुर कलर (रंगीन ब्रायलर) के साथ कड़कनाथ (देसी  चूजा प्रजाति) का संकरण कराकर इस तरीके से किया गया है जिससे इस नई व उन्नत नस्ल में कड़कनाथ नस्ल के 25 प्रतिशत  पैतृक गुण और जबलपुर कलर प्रजाति के 75 प्रतिशत  पैतृक गुण शामिल  हैं।

इस प्रजाति के पक्षियों का विकास पूरी तरह से पालन की अहाता,  स्वतंत्र विचरण वाली स्वच्छता तथा अर्ध-सघन प्रणालियों के लिए किया गया है। इस प्रजाति के पक्षी देसी  चूजे की तरह दिखते हैं लेकिन उनमें कहीं अधिक वृद्धि और उत्पादन क्षमता होती है, ये कम पोषण  एवं प्रबंधन परिस्थिति में बेहतर तरीके से बचे एवं बने रह सकते हैं और इनमें मध्यम आकार (50.2 ग्राम) के भूरे छिलके अथवा आवरण वाले अण्ड़े उत्पन्न होते हैं।  इन पक्षियों में पंखों का बेहद आकर्षक  अलग-अलग रंग (काला, भूरा, मटमैला तथा मिश्रित) पैटर्न तथा मजबूत कदकाठी देखने को मिलती है और ये खुले परिवेश  में बहुत तेज दौड़ते हैं। इनकी विशेषताएं सफाई करने में मदद करती हैं और साथ ही इन्हें परभक्षियों से भी बचाती हैं। नर्मदानिधि  पक्षी अच्छी तरह से फलते-फूलते हैं और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों को भी अपना लेते हैं तथा दूरवर्ती क्षेत्रों में भी किसान इनको पालना पसंद करते हैं। इस नस्ल के पक्षी अहाता/मुक्त विचरण परिवेश  में 8 सप्ताह में 700 से 800 ग्राम शरीर  भार हासिल कर लेते हैं। अहाता पालन की परिस्थितियों में 20 सप्ताह की आयु पर नर तथा मादा पक्षी का शरीर  भार क्रमश: लगभग 1550 ग्राम और 1300 ग्राम होता है। मादा प्रतिवर्ष 181 अण्ड़े देती है।

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इस समारोह में जे.एन.के.वी.वी. के कुलपति विशिष्‍ट अतिथि थे तथा समारोह की अध्यक्षता नानाजी देशमुख पशु  चिकित्सा विज्ञान विश्‍वविद्यालय के कुलपति द्वारा की गई।

इस समारोह में भारतीय कृषि  अनुसंधान परिषद  मुख्यालय, संबंधित भाकृअनुप संस्थानों, संबंधित विश्‍वविद्यालयों तथा पोल्ट्री प्रजनन पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के वरिष्‍ठ  अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर कृषक महिलाओं एवं स्थानीय किसानों को नर्मदानिधि  नस्ल के चूजे वितरित किए गए।

(स्रोत: पशु विज्ञान प्रभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद)