कृषि मंत्री द्वारा मेद्जीफेमा में अतिथि गृह व प्रशिक्षण केन्द्र का शिलान्यास

7 अगस्त, 2016, मेद्जीफेमा

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, श्री राधा मोहन सिंह द्वारा भाकृअनुप- राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, झरनापानी, मेद्जीफेमा में अतिथि गृह व प्रशिक्षण केन्द्र का शिलान्यास किया गया। इस अवसर पर उन्होंने केन्द्र परिसर में ‘मिथुन प्रतिमा’ का भी अनावरण किया। 

Shri Radha Mohan Singh Laid Down Foundation Stone of 'Training-cum-Guest House'Shri Radha Mohan Singh Laid Down Foundation Stone of 'Training-cum-Guest House'Shri Radha Mohan Singh Laid Down Foundation Stone of 'Training-cum-Guest House'

मंत्री महोदय ने अपने संबोधन में केन्द्र द्वारा विकसित वैज्ञानिक मिथुन पालन में उपयोगी तकनीकों की चर्चा की जिनकी सहायता से क्षेत्र की जैव विवधता को संरक्षित करने में मदद मिली। इसके साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों में आर्थिक विकास के अलावा पारिस्थितिकी स्थिरता में भी इन तकनीकों ने सहयोग किया। 

श्री सिंह ने कहा कि बागवानी आधारित खेती प्रणाली में स्थिरता लाने के लिए पशुपालन का एकीकरण आवश्यक है। भारत सरकार द्वारा देसी पशु नस्लों को संरक्षित करने एवं बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन, पशुधन मिशन एवं पशु चिकित्सा योजना जैसे कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं।

नगालैंड के माननीय मुख्यमंत्री, श्री टी.आर. जेलिआंग ने अपने संबोधन में कहा कि मिथुन एक शानदार बनावट वाला मूल्यवान पशु है जिसे ‘काला सोना’ भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि ‘मिथुन दिवस’ की शीघ्र ही घोषणा की जायेगी जिसे नगालैंड एवं अन्य मिथुन पालक राज्यों में मनाया जायेगा।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने संस्थान के वैज्ञानिकों एवं स्टॉफ से चर्चा की। 

डॉ. अभिजीत मित्रा, निदेशक, भाकृअनुप- राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र ने सभी गणमान्यों का स्वागत किया एवं संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर संस्थान द्वारा विकसित अर्द्ध-गहन मिथुन पालन पद्धति के साथ ही 28 वर्षों के दौरान विकसित विभिन्न तकनीकों पर प्रस्तुति दी गई। 

श्री एस. चुबा लौंगकुमार, संसदीय सचिव, पशु चिकित्सा एवं पशुपालन, नगालैंड, श्री छबिलेन्द्र राऊल, अपर सचिव, डेयर एवं सचिव, भाकृअनुप, डॉ. एच. रहमान, उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान), डॉ ए.के. सिंह, उपमहानिदेशक (कृषि विस्तार), प्रो. एम. प्रेमजीत सिंह, कुलपति, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल, डॉ. भास्कर, सहायक महानिदेशक (एनआरएम), डॉ. एस.वी. नचान, निदेशक, उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, बारापानी, डॉ. विद्युत डेका, निदेशक, अटारी, क्षेत्र-3, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय इम्फाल से संबंधित कॉलेजों के डीन और डॉ. एस.के.सिंह, पी.एस. एवं कृषि मंत्री के तकनीकी सलाहकार ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

(स्रोतः भाकृअनुप- राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, मेद्जीफेमा)