गुजरात में खरीफ 2016 हेतु आकस्मिक कृषि योजनाओं की तैयारी में रणनीतिक तेजी

23 जून, 2016, अहमदाबाद

Enhancing the Preparedness for Agricultural Contingences in Gujarat: Kharif 2016 खरीफ 2016 में गुजरात की आकस्मिक कृषि योजनाओं की तैयारी में तेजी लाने के लिए भाकृअनुप- केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान (क्रीडा) और कृषि एवं सहकारिता विभाग (डीएसी) तथा कृषि विभाग, गुजरात के सहयोग से 23 जून, 2016 को एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य खरीफ 2016 के दौरान मानसून की स्थिति के बारे में सूचना देना, पिछले वर्ष के दौरान आकस्मिक योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े अनुभवों का दस्तावेजीकरण, वर्तमान वर्ष में मौसमी विचलन से निपटने के लिए आपात योजना की समीक्षा करना इत्यादि शामिल हैं।

इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. एस.आर. चौधरी, कृषि निदेशक, गुजरात ने की तथा डॉ. आर.ए. शेरासिया, निदेशक, बागवानी, डॉ. के.एस. देतरोजा, अतिरिक्त निदेशक, कृषि, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, कृषि अनुसंधान एवं विस्तार, विभिन्न क्षेत्रों के संयुक्त कृषि निदेशक, गुजरात के सभी जिलों के जिला कृषि अधिकारी, एआईसीआरपीडीए एवं एआईसीआरपीएएम केन्द्रों के वैज्ञानिक, केवीके एवं इनपुट एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया।

डॉ. एस.आर चौधरी ने खरीफ 2015 के दौरान मौसमी विचलन के प्रबंधन से जुड़े अनुभवों के बारे में बताया और खरीफ 2016 की मौसमी विचलन से निपटने के लिए तैयारियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि खरीफ 2015 के दौरान बनासकांठा जिले में 48 घंटे में 26 इंच वर्षा के कारण ऊपरी मृदा के कटाव और कपास की खड़ी फसल के नुकसान संबंधी अनुभवों को साझा किया।

डॉ. मोहम्मद उस्मान, प्रधान वैज्ञानिक और प्रमुख पीएमई सेल, क्रीडा ने खरीफ 2016 के दौरान मानसून की स्थिति और बैठक के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने क्रीडा के सहयोगी हितधारकों से समन्वय की मांग की जिससे जिला कृषि आकस्मिक योजनाओं को अद्यतन करने में सहयोग मिल सके।

संयुक्त निदेशक, (कृषि), बागवानी अधिकारी, आठ कृषि जलवायु क्षेत्रों के केवीके अधिकारियों ने वर्ष 2015 के अनुभवों और वर्तमान फसल मौसम संबंधित योजनाओं को साझा किया। इसी क्रम में प्रतिनिधियों ने किसी भी प्रकार के मौसमी विचलन से निपटने के लिए प्रबंधन, ज्ञान और अनुभवों को साझा किया।

अनुशंसाएं

  • वर्षा विविधता की स्थिति से निपटने के लिए कपास और अरंडी जैसी लंबी अवधि वाली फसलों को प्रोत्साहित करना।
  • बीच मौसम में सूखे से निपटने के लिए मृदा में जैविक कार्बन को बढ़ाने के लिए फसल अवशेषों के पुनर्प्रयोग को बढ़ावा देना
  • भारी मृदा में अधिक बरसात संबंधी हानि से बचने के लिए चौड़ी हल रेखा वाली जुताई को प्रोत्साहित करना
  • प्रत्येक खेत में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अनुसार जलकुंड निर्माण
  • कपास के स्थान पर आपात फसल के तौर पर मूंगफली व अरंडी की फसल को बढ़ावा देना
  • अंतःफसल के तौर पर मूंगफली, मक्का, बाजरा आदि के साथ ही अरहर को शामिल करने को बढ़ावा देना
  • पिंक बॉल वार्म के उच्च प्रकोप के कारण कपास की फसल को हतोत्साहित करना
  • चारे का मौसम बीत जाने की स्थिति में हरे चारे को भविष्य में प्रयोग के लिए संग्रह करने को प्रोत्साहित करना

(स्रोतः भाकृअनुप- केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)