कृषिवानिकी पर एआईसीआरपी की वार्षिक समूह बैठक

18-20 जून 2016, सोलन

Annual Group Meeting of AICRP on Agroforestryकृषि वानिकी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की तीन दिवसीय (18-20 जून, 2016) वार्षिक समूह की बैठक डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन में आयोजित की गयी।

डॉ. वी. एस. ठाकुर, कुलपति, डॉ. वाईएसपीयूएच एंड एफ, सोलन ने अपने उद्घाटन भाषण में छोटे और सीमांत किसानों के लाभ के लिए उचित कृषि वानिकी मॉडलों के प्रचार-प्रसार पर बल दिया। उन्होंने कृषि वानिकी मॉडल में आजीविका विकल्पों को जोड़कर एक करने की आवश्यकता भी जोर दिया।

डॉ. एस. भास्कर, सहायक महानिदेशक (एजीआरओएन, एएफ एंड सीसी) भाकृअनुप ने कृषि वानिकी की पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रारंभ करने और वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए तकनीकी कार्यक्रम को नया स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. पी.एस. पाठक, पूर्व सहायक महानिदेशक (कृषि वानिकी), भाकृअनुप ने अनुसंधान कार्यक्रम और भविष्य की आवश्यकताओं के बीच अंतर की चर्चा की।

डॉ. ओ.पी. चतुर्वेदी, परियोजना समन्वयक एवं निदेशक, भाकृअनुप- केन्द्रीय कृषिवानिकी अनुसंधान संस्थान, झांसी ने वर्तमान वर्ष में परियोजना द्वारा किए गए अनुसंधानों के बारे में जानकारी दी।

डॉ. नरेन्द्र सिंह राठौर, उपमहानिदेशक (शिक्षा) बैठक के दौरान पूरे सत्र के अध्यक्ष थे और डॉ. पी.के. खोसला, पूर्व कुलपति, सीएसकेएचपीकेवीवी, पालमपुर बैठक के सम्मानित अतिथि थे।

इस अवसर पर 'देश के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों के लिए कृषि वानिकी प्रौद्योगिकियां', 'हरियाणा के लिए संभावित कृषि वानिकी प्रणाली', 'कृषि वानिकी पर एक परिचय- एआईसीआरपी- 2016' और 'ग्रेविया ओप्टिवा उत्तर-पश्चिमी हिमालय के लिए एक महत्वपूर्ण एमपीटी' नामक चार प्रकाशन जारी किए गए।

(स्रोत: भाकृअनुप - केंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान, झांसी)