खरीफ दलहन की वार्षिक सामूहिक बैठक व दाल पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

21 मई, 2016, बैंगलूरू

अरहर पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं की वार्षिक सामूहिक बैठक, मूर्लाप (मूंग, उड़द, मसूर, मटरी, राजमा और मटर), शुष्क फलियों पर नेटवर्क प्रायोजन (22-24 मई, 2016) और एकीकृत माध्यम से सतत और पर्याप्त दलहन उत्पादन पर राष्ट्रीय सम्मेलन (21-22 मई, 2016) का उद्घाटन संयुक्त रूप से 21 मई, 2016 को यूएएस, बैंगलूरू में किया गया।

Annual Group Meet of Kharif Pulses and National Conference on Pulses Inaugurated Annual Group Meet of Kharif Pulses and National Conference on Pulses Inaugurated

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने अपने संबोधन में दलहन के क्षेत्र में हुए शोध कार्यों पर प्रकाश डाला। डॉ. महापात्र ने आह्वान किया कि उत्पादकता में बड़ी सफलता के लिए नए अनुसंधान प्रयास शुरू किए जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह विचार व्यक्त किया कि सामान्य शोध कार्यों व मूल्यांकन के स्थान पर नई नवोन्मेषी विचारों को अपनाने की आवश्यकता है।

डॉ. जे. एस. संधू, उपमहानिदेशक (सीएस) ने अपने संबोधन में अरहर की खेती में बीज बदलने के लक्ष्य को प्रजनक बीजों के उत्पादन को बढ़ा कर पूरा किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने बीज केन्द्रों के निर्माण और इसके लिए बजट में प्रावधान की जानकारी दी।

डॉ. टी. शिवन्ना, कुलपति, यूएएस, बैंगलूरू ने एआईसीआरपी की दलहन वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकों की प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने यह आशा व्यक्त किया कि कर्नाटक, देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्य को नई तकनीकों के विकास एवं उनके प्रसार के लिए अधिक प्रयास करना चाहिए।

डॉ. एन.पी. सिंह, निदेशक, आईआईपीआर, कानपुर ने देश में दलहन के समग्र परिदृश्य को प्रस्तुत किया और जलवायु के कारण वर्षों से दलहन के अस्थिर उत्पादन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आह्वान किया कि वैज्ञानिकों छोटी अवधि, व्यापक रूप से स्वीकार्य और जैविक और अजैविक तनाव प्रतिरोधी किस्मों के विकास के लिए काम करें।

इसी क्रम में किस्म पहचान समिति की बैठक का आयोजन किया गया। पांच नई किस्मों पूसा 1371(मूंग), डीसी 15, टीपीटीसी 29 और लोबिया की पीसीपी 0306-1 और मोठ की आरएमबी 2251 किस्म की पहचान के लिए सिफारिश की गई।

दलहन पर राष्ट्रीय सम्मेलन संयुक्त रूप से भारतीय दलहन अनुसंधान और विकास सोसाइटी, कानपुर और यूएएस, बेंगलूरू के द्वारा आयोजित किया गया।

परियोजना समन्वयक, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विभिन्न दलहनी फसलों से संबंधित 400 से अधिक वैज्ञानिक प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप - आईआईपीआर, कानपुर)