भाकृअनुप-आईआईआरआई व सीएसआईआर को जैव प्रौद्योगिकी में उत्पाद विकास के लिए पुरस्कार

11 मई 2016, नई दिल्ली

ICAR-IIRR and CSIR-Sciences win award for product development in biotechnologyभारत के माननीय राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा भाकृअनुप – भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआईआरआर) और सेलुलर एवं आणविक जीवविज्ञान सीएसआईआर को संयुक्त रूप से 'जैव प्रौद्यौगिकी उत्पाद और प्रसंस्करण विकास और व्यवसायीकरण अवार्ड 2016' पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार 11 मई, 2016 को जीवाणु मुरझान प्रतिरोधी चावल की किस्म सांबा मसूरी के व्यावसायीकरण के लिए दिया गया।

यह पुरस्कार जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा दिया जाता है। इस पुरस्कार का उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी उत्पाद विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और नवोन्मेषों की पहचान करना है।

सांबा मसूरी जिसे बीपीटी5204 भी कहा जाता है, एक लोकप्रिय चावल की किस्म है। मूल रूप से इस किस्म को (तत्कालीन अविभाजित आंध्र प्रदेश में) आचार्य एनजी रंगा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया था। देश में इसकी खेती लाखों हैक्टर में की जाती है। सांबा मसूरी में गंभीर जीवाणु मुरझान रोग से नुकसान की संभावना है जिससे उपज में 10-50% तक नुकसान हो सकता है। बैक्टीरियल ब्लाइट बिमारी को नियंत्रित करने के लिए अभी तक सटीक जीवाणुनाशी उपलब्ध नहीं है।

दोनों संस्थानों की संयुक्त वैज्ञानिक टीम ने जैव प्रौद्योगिकी के मार्कर का उपयोग कर इस समस्या का समाधान किया। नव विकसित उन्नत किस्म सांबा मसूरी जीवाणु मुरझान रोग प्रतिरोधी है और इसमें सांबा मसूरी की गुणवत्ता और उपज विशेषताएं भी बरकरार है। इस नई किस्म के जारी होने के बाद से उन्नत सांबा मसूरी की खेती आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक आदि में 90,000 हैक्टर क्षेत्र में की जा चुकी है। सांबा मसूरी भारत के जीवाणु मुरझान रोग प्रभावित क्षेत्रों के किसानों में तेजी से लोकप्रिय होता जा रही है, जिनमें सांबा मसूरी की खेती की जाती है।
डॉ. रमेश वी सोनती और डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम ने क्रमशः सीएसआईआर-सीसीएमबी और भाकृअनुप – आईआईआरआर की टीमों का नेतृत्व किया।

(स्रोत: भाकृअनुप - चावल अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)