मुर्गी प्रजनन और पोल्ट्री बीज परियोजना पर एआईसीआरपी की वार्षिक समीक्षा बैठक

26 मई, 2016, तडोंग, गंगटोक

Annual Review Meeting of AICRP on Poultry Breeding and Poultry Seed Project भाकृअनुप - राष्ट्रीय जैविक खेती अनुसंधान संस्थान, तडोंग, गंगटोक में 'मुर्गी प्रजनन और पोल्ट्री बीज परियोजना पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) की दो दिवसीय वार्षिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का आयोजन देश के 24 केन्द्रों से संचालित मुर्गी प्रजनन और पोल्ट्री बीज परियोजना में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए किया गया था।

डॉ. पी. सेंथिल कुमार, आईएफएस, विशेष सचिव, आरएमडीडी, सिक्किम ने अपने अभिभाषण में राज्य के जैविक पशु चिकित्सा क्षेत्र में विकास के लिए परिषद के विभिन्न संस्थानों से सहयोग की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आंगन में मुर्गी पालन भविष्य में अंडे और पोल्ट्री मांस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्रमुख माध्यम होगा। इसके साथ ही उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुरोध किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण और आजीविका सुरक्षा में सुधार के लिए मुर्गी पालन पर अधिक काम करें।

डॉ. आर. एस. गांधी, अतिरक्त महानिदेशक (एपी एंड बी), भाकृअनुप ने मुर्गी पालन क्षेत्र से अधिक आय के लिए उचित स्वच्छता और समग्र प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।

इससे पूर्व डॉ. आर. के. अवास्थे, संयुक्त निदेशक, भाकृअनुप, सिक्किम केंद्र ने आश्वस्त किया कि संस्थान पशुपालन को पूरी तरह से जैविक सैक्टर में रूपांतरण के राजकीय लक्ष्य को समय पर पूरा करने में योगदान देगा।

डॉ. आर. एन. चटर्जी, निदेशक, कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य भारत में स्थानीय अंडे और पोल्ट्री मांस की आवश्यकता की पूर्ति के लिए विशेष किस्मों को विकसित करना है। उन्होंने कहा कि डीपीआर, हैदराबाद ने पोल्ट्री की विभिन्न किस्में विकासित की है। इनमें देश भर में भारी मांग वाली किस्म 'वनराजा' सबसे लोकप्रिय है।

इस दो दिवसीय बैठक में उद्घाटन सत्र सहित पांच तकनीकी सत्र शामिल थे। इनमें मुर्गी प्रजनन, पोषण, स्वास्थ्य, प्रबंधन और उत्पादन और भारत के विभिन्न राज्यों में 'वनराजा' के वितरण पर चर्चा हुई।

परिषद के विभिन्न संस्थानों और राज्य पशु चिकित्सा कॉलेजों से 35 वैज्ञानिकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और अपनी वार्षिक प्रगति रिपोर्ट पेश की।

डॉ. यू. राज कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, डीपीआर, हैदराबाद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

(स्रोतः भाकृअनुप - राष्ट्रीय जैविक खेती अनुसंधान संस्थान, तडोंग)