‘ऊंट और मानव चिकित्सा’ विषय पर विचार-विमर्श बैठक

16 मई, 2016, बीकानेर

भाकृअनुप - राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर द्वारा विकिरण चिकित्सा केंद्र, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के सहयोग से "ऊंट और मानव औषधि" विषय पर विचार-विमर्श बैठक का आयोजन किया गया। थायराइड कैंसर के रोगियों की निगरानी के लिए एक स्वदेशी इम्यूनो-रेडियो-मेट्रिक- ऐसे (आईआरएमए) किट के विकास पर प्रकाश डाला गया। इस किट में एनआरसीसी द्वारा उत्पादित ऊंट के विशेष गुणों वाले प्रतिरोधक गुणों का इस्तेमाल किया गया है जिसमें उच्च एफिनिटी अनुमापांक और एक 'कैप्चर एंटीबॉडी' होती है। एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के साथ ऊंट की एंटीबॉडी (आरएमसी में विकसित) और रेडियो लेबल्ड 125 - आई - टीजी का प्रयोग एक बहुत मजबूत और संवेदनशील आईआरएमए किट को विकसित करने में किया गया है, जो थायरोग्लोब्यूलिन (टीजी) सीरम का पता लगा सके और थायराइड कैंसर में ट्यूमर चिन्हक के रूप में कार्य कर सके। इसके साथ ही यह रोग निदान करने वाली किट कैंसर मेटास्टेसिस और पुनरावृत्ति की स्थिति में कैंसर रोगियों की पहचान एवं निगरानी में प्रभावकारी है।

 Interactive Meet on “Camel and Human Medicine” Interactive Meet on “Camel and Human Medicine”

डॉ. एच. रहमान, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप ने इस सहयोगी परियोजना की उपलब्धि की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की कि अन्य एजेंसियों / संस्थानों के साथ इस तरह के तालमेल को भाकृअनुप द्वारा सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि किट का व्यावसायिक उत्पादन किया जाएगा जिसे रेडियो चिकित्सा केंद्र, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, बार्क, मुंबई द्वारा परीक्षण के बाद मान्यता दी गई है।

डॉ. एम.जी. आर. राजन, प्रोफेसर, एचबीएनआई एवं अध्यक्ष, विकिरण चिकित्सा केंद्र, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, ने 1500 रोगियों को आईआरएमए किट के उपयोग का ब्यौरा प्रस्तुत किया। डॉ. (सुश्री) एस. कुलकर्णी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बार्क ने आर एंड डी के बारे में विवरण प्रस्तुत किया जिसके एकल डोमेन एंटीबॉडी उत्पादन में एनआरसीसी के वैज्ञानिकों द्वारा सक्रिय सहयोग दिया जा रहा है। यह प्रयास प्रतिजन और पीबीएमसी (PBMCs) की बूस्टर खुराक देने के बाद ऊंटों में प्रतिरक्षा तंत्र बढ़ाने की दिशा में है।

 डॉ. एन.वी. पाटिल, निदेशक, एनआरसीसी ने दूसरी ख्याति प्राप्त संस्थाओं के साथ एनआरसीसी की सहयोगी परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए एनआरसीसी की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी।

(स्रोतः भाकृअनुपः राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर)