दलहनी फसल प्रोत्साहन हेतु राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन

19-20 सितंबर, 2016, लेम्बूचेर्रा, त्रिपुरा

भाकृअनुप – भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर और उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के लिए भाकृअनुप का अनुसंधान परिसर, त्रिपुरा केन्द्र द्वारा लेम्बूचेर्रा, त्रिपुरा में (19-20 सितंबर, 2016) को उत्तर-पूर्वी पहाड़ियों पर प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप द्वारा दलहन प्रोत्साहन के लिए बैठक का आयोजन किया गया।

इस बैठक का उद्देश्य उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में दलहन की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं के साथ ही दलहन उत्पादन बढ़ाने संबंधी कार्य योजना एवं रणनीति तैयार पर केन्द्रित था।

State level farmers’ meet on promotion of PulsesState level farmers’ meet on promotion of PulsesState level farmers’ meet on promotion of Pulses

श्री नरेश चन्द्र जमातिया, वन, ग्रामीण विकास एवं चुनाव मंत्री, त्रिपुरा ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र दलहन उत्पादन में देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा अभी भी पीछे है। दलहनी फसलों की बड़े स्तर पर उत्पादन न होने का कारण इन फसलों को प्राथमिकता न देना है। उन्होंने किसान समुदाय से यह आग्रह किया कि वे खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए दलहन की खेती को अपनाएं।

डॉ. एस.वी. नचान, निदेशक, आईसीएआर- आरसी एनईएच, उमियाम, मेघालय ने सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों द्वारा उत्तर- पूर्वी क्षेत्र में दलहन की 81.7 प्रतिशत की कमी को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चावल के परती खेतों में शून्य जुताई द्वारा दलहनी फसलों को लोकप्रिय बनाना पहली प्राथमिकता है। डॉ. नचान ने कहा कि बीज ग्राम की अवधारणा के साथ ही विभिन्न तनाव प्रतिरोध किस्मों को विकसित करने की दिशा में मजबूती से कार्य किया जाना चाहिए।

डॉ. एन.पी. सिंह, निदेशक, आईसीएआर- आईआईपीआर, कानपुर ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में दलहन उत्पादन के लिए सक्रियता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों व राज्यों एवं अम्लीय एवं कमजोर मृदा के अनुकूल उपयुक्त दलहनी किस्मों के प्रचार और उचित तकनीकी हस्तक्षेप के द्वारा दलहन उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।

कुलपति, सीएयू, इंफाल, भाकृअनुप संस्थानों के निदेशकगण, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित भाकृअनुप संस्थानों के वैज्ञानिकों, राज्य कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारियों, राज्य कृषि विभागों के निदेशक एवं अधिकारीगण और बीज उत्पादक एजेंसियों ने बैठक में भाग लिया।

बैठक में 400 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें से 300 किसान प्रतिनिधि थे।

(स्रोतः भाकृअनुप – भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर)