जोधपुर में भाकृअनुप क्षेत्रीय समिति की बैठक

13-14 सितंबर, 2016, जोधपुर

ICAR Regional Committee Meeting at Jodhpurभाकृअनुप- केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर द्वारा भाकृअनुप - क्षेत्रीय समिति संख्या-6 की 24वीं बैठक का आयोजन राजस्थान, गुजरात, केंद्र शासित दमन एवं दीव और दादरा और नगर हवेली के लिए किया गया।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप द्वारा क्षेत्र की कृषि जलवायु स्थितियों, कृषि, पशुधन इत्यादि जैवविविधता के महत्व पर जोर दिया गया। उन्होंने इस बात की प्रशंसा की कि अल्प वर्षा आधारित होने के बावजूद भी इस क्षेत्र में सतत कृषि विकास, पशुपालन एवं मछली पालन के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। इसके साथ ही उन्होंने भाकृअनुप संस्थानों एवं एसएयू के प्रयासों की प्रशंसा की एवं राजकीय विभागों के साथ तालमेल का आग्रह किया।

डॉ. के. अलगूसुंदरम, उपमहानिदेशक, कृषि अभियांत्रिकी ने इस क्षेत्र की सौर ऊर्जा संभावनाओं पर जोर दिया और साथ ही इस दिशा में काजरी संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की जिसे और अधिक बढ़ाने की बात कही। पानी की कमी को देखते हुए उन्होंने उन्नत सिंचाई तकनीकों को लोकप्रिय बनाने की बात कही।

श्री सुनील कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव एवं आर्थिक सलाहकार (डेयर, भाकृअनुप) ने अपने संबोधन में कहा कि इस क्षेत्र की कृषि समस्याओं को दूर करने के लिए वैज्ञानिक समुदाय एवं राज्य सरकार को मिलकर काम करना चाहिए।

भाकृअनुप शासी निकाय के सदस्य श्री एस.के. भार्गव, श्री आर.पी. सिंह और श्री सुरेश चंदेल ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया एवं अपने मूल्यवान सुझाव भी प्रस्तुत किए।

डॉ. ओपी यादव, निदेशक, काजरी एवं सदस्य सचिव, क्षेत्रीय समिति ने पिछले वर्ष 2014 में आणंद, गुजरात में आयोजित बैठक में किए जाने वाले कार्यों की प्रगति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की।

डॉ. जे.एस. संधू, उपमहानिदेशक, फसल विज्ञान, डॉ. ए.के. सिंह, उपमहानिदेशक, कृषि विस्तार एवं बागवानी विज्ञान, कुलपति, एसएयू, राजस्थान और गुजरात, भाकृअनुप संस्थानों के निदेशक गण, मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और गुजरात राजस्थान के संबंधित विभागों के अधिकारियों ने क्षेत्र के कृषि मुद्दों पर कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस दो दिवसीय बैठक में कृषि विषयों पर केंद्र एवं राज्य के विभिन्न समन्वय मुद्दों तथा शिक्षा एवं विस्तार आदि पर चर्चा की गई। इसके साथ ही क्षेत्र की सूखा प्रभावित एवं कमजोर कृषि जैविकी के संदर्भ में सतत विकास संबंधी बिंदुओं पर कार्य योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया।

(स्रोतः भाकृअनुप - केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान जोधपुर)