चारा फसलें तथा उपयोगिता पर एआईसीआरपी की राष्ट्रीय समूह बैठक

झांसी, 6 सितंबर 2016

प्रो. पी. राजेन्द्रन (कुलपति, केरल कृषि विश्वविद्यालय) द्वारा ‘रबी 2015-16 के लिए चारा फसलें तथा उपयोगिता’ विषय पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान प्रायोजना (एआईसीआरपी) की दो दिवसीय राष्ट्रीय समूह बैठक का उद्घाटन किया गया। यह कार्यक्रम वेल्लायनी – तिरूवंतपुरम कैंपस में 5 सितंबर, 2016 को आयोजित किया गया। उन्होंने केरल में मांस एवं दूध की बढ़ती मांग के कारण दूसरे राज्यों से पशु उत्पादों के आयात को कम करने के लिए पशुधन पर ध्यान केन्द्रित करने पर बल दिया। प्रो. राजेन्द्रन ने कहा कि किसानों को पशुधन से उच्च आय के लिए सुलभ एवं प्रयोग में आसान प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है।

National Group Meeting of AICRP on Forage Crops and Utilization

बैठक में तकनीकी सत्र आयोजित किए गए जिसमें पिछले वर्ष नतीजों पर आधारित तकनीकी कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया गया एवं उस पर चर्चा की गई। समापन सत्र में 2016-17 के लिए तकनीकी कार्यक्रम को विषयों के आधार पर संबंधित सत्रों में तय किया गया। विभिन्न प्रशासकीय, आर्थिक एवं वैज्ञानिक मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

बैठक में रबी 2015-16 योजना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप परियोजना के आधार पर विचार-विमर्श किए गए जिनमें चारा अनुसंधान के लिए केएयू द्वारा जारी गतिविधियां, बीज व पौधरोपण सामग्री की उपलब्धता और राज्य के लिए अनुकूल प्रौद्योगिकियां आदि शामिल हैं। डॉ. आई.एस. सोलंकी, सहायक महानिदेशक (एफ एंड एफसी) ने समापन सत्र की अध्यक्षता की और कहा कि दूसरे क्षेत्रों से प्रतिस्पर्धा होने के कारण चारे का क्षेत्रफल नहीं बढ़ सकता। इस स्थिति में प्रति हैक्टर उत्पादन दर को बढ़ाने व फसल अवधि को घटाने का प्रयत्न होना चाहिए। इसके साथ ही चारा फसल संसाधन की वृद्धि के लिए नई संभावनाओं की तलाश भी करनी चाहिए। डॉ. सोलंकी ने विभिन्न फसल चक्र के लिए अनुकूल पोषकता से भरपूर उन्नत चारे को विकसित करने का आग्रह किया।

किस्म चयन समिति की बैठक के दौरान ‘ओएल-1802’, ‘ओएल - 1804’ (पीएयू, लुधियाना); ‘ओएस- 403’ ‘ओएस-405’ (सीसीएसएचएयू, हिसार) ‘आरओ – 11-1’ (एमपीकेवी, राहुरी) जई की एक व विभिन्न कटाई पद्दति को विभिन्न क्षेत्रों में जारी करने के लिए चिन्हित किया गया।

कार्यक्रम में एआईसीआरपी चारा फसलों पर रिपोर्ट, न्यूनतम वर्णनकर्ता (चारा फसलें), फसल किस्में – उनकी मांग एवं आपूर्ति; सतत चारा उत्पादन के लिए नवोन्मेषी तकनीक, केएयू स्मारिका, एसकेआरएयू द्वारा खरीफ में लोबिया और बाजरा से हरा चारा उत्पादन और एआईसीआरपी केन्द्रों द्वारा विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित विस्तार बुलेटिन आदि प्रकाशन जारी किए गए।

120 से अधिक चारा वैज्ञानिकों, सीएयू, एसएयू व आईसीएआर से विशेषज्ञों एवं हितधारकों, क्षेत्रीय चारा स्टेशनों, पशुपालन विभाग, डेरी एवं मात्स्यिकी; राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड और निजी कंपनियों/संस्थानों ने बैठक में भाग लिया। प्रगतिशील किसानों ने संवाद सत्र में भाग लिया एवं वैज्ञानिकों से बातचीत की।

(स्रोतः चारा फसल एवं उपयोगिता पर एआईसीआरपी की राष्ट्रीय समूह बैठक, झांसी)