अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (चारा फसलें एवं उपयोगिता) की राष्ट्रीय समूह बैठक

16-17 मई, 2016, श्रीनगर

National Group Meeting of All India Coordinated Research Project (Forage Crops & Utilization) Organized अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (चारा फसलें एवं उपयोगिता) की राष्ट्रीय समूह बैठक खरीफ 2016 का आयोजन एसकेयूएएसटी, कश्मीर, श्रीनगर (मई 16-17, 2016) में आयोजित किया गया।

प्रो. नजीर अहमद, कुलपति ने अपने उद्घाटन भाषण में इस तथ्य पर जोर दिया कि पशुधन और कृषि प्रारंभ से ही एक-दूसरे के पूरक रहे हैं जो कि समग्र खाद्य सुरक्षा की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। जम्मू-कश्मीर राज्य में आजीविका के लिए चरागाह एक घटक के रूप में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है क्योंकि यहां की बहुतायत आबादी पूरी या आंशिक रूप से पशुधन पर निर्भर है।

डॉ. ए.के. राय, प्रोजेक्ट समन्वयक, एआईसीआरपी – एफसीयू ने राज्य की एआईसीआरपी परियोजना, चारा व पशुधन के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने परियोजना द्वारा खरीफ- 2015 में उठाये गए कदमों के बारे में भी चर्चा की।

डॉ. जे.एस. चौहान, सहायक महानिदेशक (बीज), भाकृअनुप ने पोषण सुरक्षा और आजीविका में चारे के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चारा फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाना मुश्किल है फिर भी उत्पादकता बढ़ाने और चारे के लिए उपयुक्त नये स्थानों का पता लगाने के लिए प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि देश में चारे के स्रोत वाले भू-भागों की उत्पादकता व उनके क्षेत्रफल से जुड़ी सूचनाओं की पुनः समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही यह कार्य जंगलों व पहाड़ी खेतों में विशेष रूप से होना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि, डॉ. आई.एस. सोलंकी, सहायक महानिदेशक (एफएफसी), भाकृअनुप ने मैदानी घास एवं फलीदार फसलों की पोषक किस्मों के विकास तथा किसानों तक इनके प्रसार का आग्रह किया। उन्होंने प्रजनन-पूर्व व भागीदारी वाले किस्मों के विकास तथा बीज उत्पादन की आवश्यकता को दुहराया जिससे बीज की मांग को पूरा किया जा सके।

इस अवसर पर वार्षिक रिपोर्ट और क्षेत्रीय भाषाओं में विस्तार बुलेटिन सहित दस प्रकाशन जारी किए गए। इस बैठक में टीएनएयू, कोयम्बटूर द्वारा लोबिया (टीएनएफसी - 0924) की एक किस्म को चिन्हित कर पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अनुशंसित किया गया। इस केन्द्र द्वारा किसान उपयोगी चारा फसल उत्पादन व सुरक्षा प्रौद्योगिकियों की भी सिफारिश की गई।

बैठक के 10 तकनीकी सत्रों में पिछले वर्ष जारी तकनीकी कार्यक्रम पर आधारित परिणाम प्रस्तुत किये गये तथा इस पर चर्चा आयोजित की गई । वर्ष 2016-17 के लिए विषयानुसार तकनीकी कार्यक्रमों को भी अंतिम रूप दिया गया।

एसएयू एंड आईसीएआर तथा निजी और सार्वजनिक संस्थानों से आए लगभग 120 चारा फसल वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों व अन्य ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इसके साथ ही 100 से अधिक स्थानीय किसानों ने किसान-वैज्ञानिक संवाद में भाग लिया।

श्री संदीप कुमार नायक, प्रधान सचिव, कृषि विभाग, जम्मू-कश्मीर अंतिम सत्र के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि कृषि एवं पशुधन विकास के लिए अनुशंसाओं को राज्य में क्रियान्वित किया जाएगा।

डॉ. ए.के. राय परियोजना समन्वयक ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

(स्रोतः चारा फसलों के लिए एआईसीआरपी, आईजीएफआरआई, झांसी)