भाकृअनुप – केंरोफअसं, कासरगोड़ शताब्दी समारोह

10 दिसंबर, 2016, कासरगोड़

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह द्वारा दिनांक 10 दिसंबर 2016 को भाकृअनुप - केंद्रीय रोपड़ फसल अनुसंधान संस्थान, कासरगोड़ में किसान मेला शताब्दी प्रदर्शनी, शताब्दी पार्क, शताब्दी भवन और कल्पका अतिथि गृह का उद्घाटन किया गया।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, श्री पी. करुणाकरन, सांसद, कासरगोड, श्री एस. ई. चंद्रशेखरन, माननीय राजस्व एवं आवास मंत्री, केरल, श्री अनंत कुमार हेगड़े, संसद सदस्य, उत्तर कन्नड़, श्री नलिन कुमार कटील, सांसद, दक्षिण कन्नड़, श्री एन.ए. निल्लिकुन्नु, विधायक, श्री एस. आर. सतीशचंद्रा, अध्यक्ष, कैमपको, डॉ. चौड़प्पा, निदेशक, आईसीएआर- सीपीसीआरआई, कासरगोड, डॉक्टर ए.के. सिंह, अध्यक्ष, नारियल विकास बोर्ड सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। मंत्री महोदय ने केंद्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान के प्रमुख प्रकाशनों जैसे, ‘सीपीसीआरआई-100 इयर्स ऑफ़ साइंटिफिक एक्सीलेंस, हारवेस्टिंग विजडम ऑफ कोकोनट ग्रोवर्स’ के साथ-साथ नारियल से निर्मित मूल्य संवर्धित उत्पादों का भी विमोचन किया। इसके साथ ही उन्होंने कृषि विज्ञान प्रबंध निदेशालय, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘इंडियन हार्टिकल्चर’ पत्रिका का विमोचन किया

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डॉ. त्रिलोचन महापात्र सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप द्वारा नारियल अनुसंधान एवं विकास पर केन्द्रित तीसरी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही डॉ. महापात्र द्वारा रोपण फसलों की जैवप्रौद्योगिकी, रोपण फसलों पर जलवायु परिवर्तन प्रभाव और रोपण फसल के रोग कीट और विकार नामक प्रकाशनों को जारी किया गया।

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मंत्री महोदय द्वारा वैज्ञानिक, किसान, उद्यमियों तथा हितधारकों को शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में संबोधित किया गया। मंत्री महोदय ने बताया कि देश स्तर पर औसत भू-धारण 1.15 हैक्टर है जबकि केरल में यह मात्र 0.22 है. है। इस स्थिति में रोपण फसलों से अधिक आय की प्राप्ति के लिए एकीकृत कृषि पद्धति को अपनाने की आवश्यकता है ताकि कृषि को लाभकारी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि बहुआयामी फसल चक्रण पद्धति को अपनाने तथा इसमें नारियल के साथ- साथ काली मिर्च, केला, अनन्नास, अदरक, हल्दी, जायफल और जिमीकंद को भी शामिल करने पर बल दिया जिससे केरल के किसान लाभान्वित होंगे। मंत्री महोदय ने कहा कि संस्थान द्वारा रोपण फसलों से संबंधित विभिन्न नवोन्मेषी तकनीकों के विकास से राष्ट्र के विकास में योगदान दिया गया है।

मंत्री महोदय ने बताया कि भारत नारियल उत्पादक विश्व के अग्रणी देशों में से एक है और केरल का नारियल उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2014-15 की अवधि में कुल नारियल उत्पादन का 24 प्रतिशत केरल के 32 प्रतिशत क्षेत्रफल से प्राप्त किया गया। वर्ष 2015-16 में 14 50 करोड़ रुपये मूल्य का नारियल निर्यात भी किया गया।

मंत्री महोदय ने बताया कि जैवविविधता रणनीति बनाने में केरल की भूमिका अग्रणी है इसके अलावा पशुधन और मछली पालन क्षेत्र में भी विकास की गति बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय द्वारा किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाए प्रारंभ की गई हैं। ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के तहत केरल में कारपूझा और मोवाटूपूझा में सिंचाई योजना शुरू की गई है जो मार्च 2018 तक पूरी की जानी है। ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना’ के तहत 7,05,420 मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को वितरित करने का लक्ष्य है। केरल में अभी तक 1,32,828 मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किये गये हैं। परंपरागत ‘कृषि विकास योजना’ के तहत 119 गांवों के समूह के लिए 382,2.22 लाख रुपए आवंटित किये गये हैं जिसके व्यय के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रमाणित किया जाना शेष है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक क्रांतिकारी बीमा योजना है लेकिन इस योजना का कार्यान्वयन अभी तक केरल में नहीं किया गया है। राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के साथ 250 से अधिक मंडियों को 6 सितंबर, 2016 तक जोड़ा जा चुका है तथा मार्च 2018 तक 585 अन्य मंडियों को जोड़े जाने का लक्ष्य है लेकिन केरल में ई-राष्ट्रीय कृषि मंडी योजना प्रारंभ नहीं की गई है। मंत्री महोदय ने किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न केंद्रीय कृषि योजनाओं के कार्यान्वयन पर बल दिया।

मंत्री महोदय द्वारा शताब्दी समारोह के दौरान विभिन्न कृषि कार्यक्रमों के आयोजन के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की गयी।

(स्रोतः भाकृअनुप – केन्द्रीय रोपड़ फसल अनुसंधान संस्थान, कासरगोड़)