पशुपालन टाइप कल्चर के लिए राष्ट्रीय केन्द्र की वार्षिक वैज्ञानिक समीक्षा

9 जनवरी, 2017, करनाल

पशुपालन टाइप कल्चर के लिए राष्ट्रीय केन्द्र की वार्षिक वैज्ञानिक समीक्षाभारत की पहली पशुधन क्षेत्र से पशु रोगाणुओं के संग्रहण, पहचान, दस्तावेजीकरण तथा लक्षण वर्णन सुविधा, नेशनल वेटेनरी टाइप कल्चर सेन्टर (एनसीवीटीसी) द्वारा नेटवर्क परियोजना के लिए 7वीं वार्षिक वैज्ञानिक समीक्षा बैठक का आयोजन भाकृअनुप- राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा में किया गया।

डॉ. एच. रहमान, उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान) द्वारा रोगाणुओं के एक्स-सिटू संरक्षण तथा महत्वपूर्ण रोगकारकों के संग्रहण और लक्षण वर्णन की ओर कल्चर संग्रहण को केन्द्रित करने पर बल दिया गया ताकि उन्हें पशु रोग नियंत्रण के लिए प्रभावी टीका उपभेदों के साथ तुलना की जा सके तथा एंटीबायोटिक प्रतिरोधिता से निपटने के साथ ही ग्रीनहाउस द्वारा जलवायु परिवर्तन को कम किया जा सके। उन्होंने आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पशुधन जैसे, गोपशु, भैंस व शूकरों के रोगाणु संग्रह को बढ़ाने पर बल दिया। डॉ. रहमान ने एनसीवीटीसी द्वारा रोगाणुओं के पुनर्व्यवस्था दस्तावेजीकरण आईएसओ9001-2008 से संबंधित नेटवर्क यूनिट के लिए कार्यशाला आयोजित करने के लिए एनसीवीटीसी से आग्रह किया।

डॉ. ए.के. श्रीवास्तव, निदेशक, आईसीएआर- एनडीएआरआई द्वारा भविष्य में अनुसंधान कार्यों तथा पशुधन उत्पादकता विकास में लाभकारी विशेषतौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में वेक्सिन व प्रोबायोटिक के लिए रोगाणुओं के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण में एनसीवीटीसी के महत्वपूर्ण भूमिका की चर्चा की ।

डॉ. बी.एन. त्रिपाठी, परियोजना समन्वयक, एनसीवीटीसी व निदेशक, भाकृअनुप – राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान ने अपने संबोधन में वर्षों के दौरान रिपोजिटरी के रूप में प्रगति के लिए केन्द्र के सदस्यों की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने सूचना दी कि वर्तमान में एनसीवीटीसी के कार्यक्रम आईएसओ 9001-2008 पद्धति के अधीन है। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि ठोस प्रयासों के तहत रिपोजिपटी द्वारा लगभग 3000 कल्चर के संग्रह द्वारा एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की गई है।

समीक्षा बैठक में पूरे देश से विभिन्न नेटवर्क यूनिट से लगभग 30 पीआई/सीओ- पीई ने भाग लिया।

(स्रोतः भाकृअनुप- राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र, हिसार)