पूर्वी क्षेत्र मे पशुधन एवं कुक्कुट पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बैठक

19 दिसंबर, 2016, पटना

पूर्वी क्षेत्र मे पशुधन एवं कुक्कुट पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बैठकपूर्वी क्षेत्र में पशुधन एवं कुक्कुट पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बैठक आयोजित की गई जिसका उद्येश्य पूर्वी क्षेत्र के लिए पशुधन उत्पादकता तथा राज्य विशिष्ट अनुशंसाओं की प्राप्ति करना था। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह द्वारा डॉ. एच. रहमान, उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान) की अध्यक्षता में बनाई गई समिति की बैठक को पूर्वी क्षेत्र के लिए भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, पटना में 19 दिसंबर, 2016 को आयोजित किया गया।

पूर्वी क्षेत्र में पशुधन और कुक्कुट क्षेत्रों के लिए प्रौद्योगिकी और विकास के रोड मैप तैयार करने पर बैठक में श्री आर.पी. सिंह, शासी निकाय सदस्य, भाकृअनुप; प्रोफेसर पूर्णेन्दु विश्वास (कुलपति, पश्चिम बंगाल पशु एवं मात्स्यिकी विज्ञान विश्वविद्यालय); प्रोफेसर एस. पशुपालक (कुलपति, उड़ीसा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय); डॉ. आर.सी. श्रीवास्तव (कुलपति, राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय; भाकृअनुप तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, डीन, भाकृअनुप अनुसंधान केन्द्रों तथा संस्थानों के निदेशकगण ने भाग लिया।

डॉ. रहमान ने अपने संबोधन में पूर्वी क्षेत्र में विशेष तौर पर छोटे तथा सीमांत किसानों की आजीविका में बढ़ोतरी के लिए पशुधन तथा कुक्कुट पालन क्षेत्रों को मजबूत तथा विकसित बनाने के लिए भाकृअनुप की पहलों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में उन्नत जननद्रव्य की मांग को पूरा करने के लिए शूकर की एक बेहतर नस्ल झारसुक तथा एक कुक्कुट किस्म झारसिम को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा जारी किया गया है। डॉ. रहमान ने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और राज्य के पशुपालन और पशु चिकित्सा विभागों को उनके प्रयासों में सभी प्रकार की तकनीकी सहायता का आश्वासन दिया।

बैठक के विचार-विमर्श का मुख्य विषय इस क्षेत्र में किसानों द्वारा पाली जा रही पशु और कुक्कुट की विभिन्न प्रजातियों की उत्पादकता में सुधार लाने पर केन्द्रित था। पूर्वी क्षेत्र में पेश आ रही चुनौतियों में उत्पादकता वृद्धि तथा संभव समाधान की चर्चा की गई जो भाकृअनुप और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों पर आधारित हैं।

बैठक में पशु प्रजनन, पशु पोषण विशेष रूप से चारा उत्पादकता और पशुओं के स्वास्थ्य के घटकों पर आवश्यकता आधारित हस्तक्षेप के साथ विचार-विमर्श किया गया। जननद्रव्य केन्द्र बनाने में पर्याप्त बुनियादी ढांचे के विकास, क्षेत्र के लिए उपयुक्त देसी नस्लों को बढ़ावा देना और प्रतिरक्षण के तहत पशुधन आबादी की अधिक संख्या को कवर करने के लिए पशुपालकों को उन्नत चारा बीज उपलब्ध कराने के लिए रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में प्रत्येक राज्य के संबंधित विभागों द्वारा शुरू किए जाने वाली कार्य योजना को अंतिम रूप दिया गया।

(स्रोत: पशु विज्ञान प्रभाग, भाकृअनुप, नई दिल्ली)