एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोधकता के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना

5 दिसंबर, 2016, एनएएससी परिसर, नई दिल्ली

रोगाणुरोधी की प्रतिरोधकता (एएमआर) के लिए एफएओ तथा आईसीएआर द्वारा संयुक्त रूप से राष्ट्रीय कार्य योजना पर बैठक आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता डॉ. एच. रहमान, उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप द्वारा की गई।

एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोधकता के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना

डॉ. श्याम खड़का, प्रतिनिधि, एफएओ, डॉ. आर.के. सिंह, निदेशक, आईसीएआर-आईवीआरआई, डॉ. ललिता शंकर, यूएसएआईडी, डॉ. सुनील गुप्ता, एनसीडीसी, डॉ. राजेश भाटिया इत्यादि द्वारा इस बैठक में भाग लेने के साथ ही वैश्विक कार्य योजना के लिए आधारभूत लक्ष्यों पर सुझाव भी दिए गए।

एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोधकता सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में प्रमुख है। यह समस्या विशेषकर भारत जैसे विकासशील देशों में प्रभावी है जहां दवाइयों की सुलभता तथा भारी खपत के परिणामस्वरूप एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग के कारण प्रतिरोधकता विकासशीत देशों की तुलना में ज्यादा है।

एकल स्वास्थ्य दृष्टिकोण हेतु पांच लक्ष्यों पर विचार-विमर्श किए गएः

  • एएमआर से संबंधित जागरूकता एवं समझ पैदा करना
  • निगरानी के लिए ज्ञान को मजबूत करना
  • संक्रमण की घटनाओं में गिरावट लाना
  • एंटीबायोटिक दवाओं के प्रयोग में सुधार
  • स्थायी निवेश के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के आर्थिक उपयोग का विकास

निम्नलिखित सुझाव विशेषज्ञों द्वारा दिये गए और अध्यक्ष महोदय द्वारा अनुशंसित किये गएः

  • सभी क्षेत्रों में जनजागरूकता
  • एंटीमाइक्रोबियल / एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग पर सख्त निगरानी
  • जिला तथा ब्लॉक स्तर पर नियामक तंत्र
  • एंटीबायोटिक पैकेट पर विशेष चिन्ह
  • मिशन स्तर पर लंबी अवधि तक अध्ययन
  • क्षमता निर्माण और राष्ट्रीय नेटवर्क कार्यक्रम
  • सामान्य मानक संचालन प्रक्रिया का विकास और कार्यान्वयन (एसओपी)
  • अंतर-क्षेत्रीय समन्वय के साथ केन्द्रीय बिन्दु की पहचान
  • एंटीमाइक्रोबियल के उत्पादन, वितरण तथा प्रयोग पर डेटा निर्माण
  • विभिन्न क्षेत्रों के साथ डेटा साझा करना

(स्रोतः पशु विज्ञान संभाग, भाकृअनुप)