महानिदेशक, भाकृअनुप द्वारा क्षेत्रीय मुद्दों पर जोर

15 जनवरी, 2017, बेंग्लूरू

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप द्वारा भाकृअनुप- केन्द्रीय अंतःस्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान तथा भाकृअनुप – केन्द्रीय ताजा जल जलजीव पालन संस्थान, क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्रों का दौरा 15 जनवरी, 2017 को किया गया।

डॉ. महापात्र ने अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों तथा स्टॉफ को संबोधन करते हुए क्षेत्रीय मुद्दे को मजबूती से सुलझाने तथा दक्षिणी राज्यों में मात्स्यिकी विकास के लिए वैज्ञानिक रूप से मजबूत रणनीति बनाने पर जोर दिया। उन्होंने मछली पालन पर केन्द्र द्वारा किए गए हाल के कार्यों जैसे मत्स्य एकाउस्टिक (ध्वनि विज्ञान), इलेक्ट्रॉनिक डाटा एक्विजेशन सिस्टम तथा मछलियों के लार्वे के लिए आहार के विकास की सराहना की। महानिदेशक महोदय ने संरक्षण, प्रसार तथा क्षेत्र की विभिन्न स्थानीय मछली किस्मों को बढ़ावा देने में भाकृअनुप संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में चर्चा की।

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कार्यक्रम के दौरान महानिदेशक महोदय ने केन्द्र तथा सीफा के फीश फार्म और प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया।

डॉ. जे.के. जेना, उपमहानिदेशक (मात्स्यिकी विज्ञान) ने दक्षिणी क्षेत्र की समृद्ध जैवविविधता तथा संरक्षण एवं प्रसार से संबंधित केन्द्र द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की।

डॉ. बी.के. दास, निदेशक, भाकृअनुप- सीआईएफआरआई द्वारा केन्द्र की प्रमुख गतिविधियों के बारे में संक्षिप्त समीक्षा प्रस्तुत की गई।

डॉ. जे.के. सुन्दरे, निदेशक, भाकृअनुप- सीफा द्वारा मत्स्य किस्मों, सांस्कृतिक स्थिति तथा क्षेत्रीय विशिष्टता पर सूचनाओं की आवश्यकता की चर्चा की ताकि इसे कर्नाटक राज्य में क्रियान्वित किया जा सके।

(स्रोतः भाकृअनुप- केन्द्रीय अंतःस्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)