‘उप हिमालयी तराई क्षेत्र के लिए बागवानी विकास’ पर कार्यशाला और ‘किसान मेला – 2016’

Workshop on “Horticulture Development for Sub-Himalayan Terai Region” andभाकृअनुप – केन्द्रीय रोपड़ फसल अनुसंधान संस्थान, कासरगोड़ के अनुसंधान केन्द्र मोहित नगर, जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल द्वारा नारियल अनुसंधान की 100वीं वर्षगांठ समारोह के अवसर पर 20 – 22 अक्टूबर, 2016 को ‘उप हिमालयी तराई क्षेत्र के लिए बागवानी विकास’ विषय पर कार्यशाला और ‘किसान मेला – 2016’ का आयोजन किया गया।

श्री खगेश्वर राय, विधायक, राजगंज ने अपने संबोधन में 100 वर्षों के दौरान आईसीएआर – सीपीसीआरआई द्वारा अनुसंधान उपलब्धियों द्वारा नारियल और सुपारी को मजबूत क्षेत्र बनाने के प्रयासों की प्रशंसा की।

डॉ. चिरंतन चट्टोपाध्याय, कुलपति, उत्तर बंगा कृषि विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में किसानों को उत्तर बंगाल में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझने का आग्रह करने के साथ ही वैज्ञानिक फसल प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

डॉ. डी. आर. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप – राष्ट्रीय आर्किड अनुसंधान केन्द्र ने उप-हिमालयी तराई क्षेत्रों में आर्किड की खेती तथा विभिन्न सब्जियों के साथ ही रोपड़ फसलों की संभावना एवं अवसर पर बल दिया।

डॉ. पी. चोवदप्पा, निदेशक, आईसीएआर – सीपीसीआरआई, कासरगोड़, ने अपने संबोधन में उत्तरी बंगाल क्षेत्र में आर्थिक सुधार में तेजी लाने के लिए नारियल आधारित मिश्रित खेती प्रणाली को अपनाने का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने आईसीएआर – सीपीसीआरआई द्वारा उत्पादित नारियल के मूल्य संवर्धित उत्पादों को बारे में भी जानकारी दी।

(स्रोतः भाकृअनुप – केन्द्रीय रोपड़ फसल अनुसंधान संस्थान, कासरगोड़)