महानिदेशक, भाकृअनुप ने नए क्षेत्रों में अनुसंधान करने पर बल दिया

24 फरवरी, 2016, भोपाल

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने आज यहां भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान, भोपाल का दौरा किया और वहां भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान और भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय उच्‍च सुरक्षा पशु रोग संस्‍थान (NIHSAD), भोपाल के वैज्ञानिकों तथा स्‍टॉफ को संबोधित किया।

DG, ICAR Emphasized Research in Newer AreasDG, ICAR Emphasized Research in Newer Areas

डॉ. महापात्र ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय कृषि का मशीनीकरण करना अति आवश्‍यक है। उन्‍होंने मध्‍य प्रदेश में 300 से भी अधिक कस्‍टम हायरिंग केन्‍द्र स्‍थापित करने के लिए भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान, भोपाल की सराहना की। महानिदेशक महोदय ने कमोडिटी संस्‍थानों के सक्रिय सहयोग से जिंसों की किस्‍मों के लिए संपूर्ण मूल्‍य श्रृंखला के विकास पर भी बल दिया। डॉ. महापात्र ने पशु रोग नैदानिकी और टीका विकास में भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय उच्‍च सुरक्षा पशु रोग संस्‍थान (NIHSAD), भोपाल के योगदान की सराहना की।

महानिदेशक महोदय के साथ डॉ. जे.एस. संधू, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) तथा डॉ. बी.बी. सिंह, सहायक महानिदेशक (ओपी) भी थे।

इससे पहले, डॉ. के.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान, भोपाल ने मशीनीकरण के माध्‍यम से भारतीय कृषि में सुधार लाने की दिशा में संस्‍थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों और प्रयासों के बारे में संक्षिप्‍त जानकारी दी।

डॉ. वी.पी. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप – राष्‍ट्रीय उच्‍च सुरक्षा पशु रोग संस्‍थान (NIHSAD), भोपाल ने अपने संस्‍थान की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी।

(स्रोत : भाकृअनुप – केन्‍द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्‍थान, भोपाल)